दत्तात्रेय भक्त सहस्त्रार्जुन

नर्मदा नदी के तट पर अवस्थित अपनी राजधानी माहिष्मति में उन्होंने लंकाधिपति रावण के अतिरिक्त नागों के राजा कार्कोटक नाग को भी हराकर बंदी बना रखा था। एक हज़ार हाथों की शक्ति होने की वरदान के कारण सहस्त्रार्जुन नाम से विख्यात माहिष्मती नरेश के पास एक हजार अक्षौहिणी सेनाएं भी थी। लेकिन परशुराम से उनकी… Continue reading दत्तात्रेय भक्त सहस्त्रार्जुन

बिहार: नया मोड़ या पुरानी राह?

बिहार के चुनाव में तीन पीढ़ियाँ और तीन दृष्टिकोण आमने-सामने हैं। नीतीश कुमार, जिनकी राजनीति स्थिरता और अनुभवी शासन का प्रतीक है। तेजस्वी यादव, जो परिवर्तन और युवा आकांक्षाओं के वाहक हैं। प्रशांत किशोर, जो मौजूदा राजनीति को बदलने की चुनौती दे रहे हैं। यह चुनाव यह तय करेगा कि बिहार पुरानी राजनीति की सीमाओं… Continue reading बिहार: नया मोड़ या पुरानी राह?

स्वच्छ यमुना से छठ व्रतियों में उमंग

पूर्वांचली समुदाय की सांस्कृतिक समृद्धि का पर्व छठ पर्व अब दिल्ली का पर्व हो चुका है, अब यमुना का पर्व हो चुका है। हर टेंपो, ऑटो, कार, गाड़ी में चलते चलते आपको छठ पर्व के भोजपुरी, मैथिली लोक धुन के गीत सुनाई पड़ जाएंगे. अब तो दिल्ली के घरों से भी ठेकुआ की सुगंध निकलती… Continue reading स्वच्छ यमुना से छठ व्रतियों में उमंग

भारत आत्मनिर्भरता की और है!

आज का भारत केवल बढ़ नहीं रहा, बल्कि शेष दुनिया को दिशा भी दे रहा है। यहां परंपरा और आधुनिकता का संगम है, जहां अर्थव्यवस्था केवल लाभ का नहीं, बल्कि लोककल्याण का माध्यम है। यह वही भारत है, जो अब दूसरों की शर्तों पर नहीं, बल्कि अपने हितों और स्वाभिमान के लिए दुनिया में पहचान… Continue reading भारत आत्मनिर्भरता की और है!

युवा विद्रोह में अब नया क्या है?

जेन-जी कोई नई परिघटना नहीं है। मगर पिछले एक सदी में जब कभी युवाओं ने ऐसे तेवर अपनाए, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंदर विकल्प होने का भरोसा उनमें बना रहता था। उदाहरण के तौर जेपी आंदोलन और असम आंदोलन से लेकर अन्ना आंदोलन तक पर गौर किया जा सकता है। मगर अब दुनिया के कई… Continue reading युवा विद्रोह में अब नया क्या है?

‘जंगल राज’ का नैरेटिव लौट आया

वास्तविकता है कि लालू प्रसाद के परिवार के साथ ‘जंगल राज’ की विरासत जुड़ी है। तेजस्वी यादव उसी विरासत के प्रतिनिधि हैं। कांग्रेस को पता था कि उनके नाम की घोषणा से लोगों की स्मृति में पुरानी सारी कहानियां फिर से जीवित हो जाएंगी। उन 15 वर्षों में कितने नरसंहार हुए, कितनी हत्याएं हुईं और… Continue reading ‘जंगल राज’ का नैरेटिव लौट आया

सर्व कल्याणकारी सूर्यदेव

पंचांग के अनुसार स्वच्छता, शुद्धता और पावनता की महत्ता से संबंधित चार दिवसीय कार्तिक छठ महोत्सव की शुरुआत 2025 में 25 अक्टूबर 2025 शनिवार को नहाय-खाय के साथ होगा। 26 अक्टूबर 2025 रविवार को विधि-विधान पूर्वक लोहंडा, खरना का आयोजन होगा। 27 अक्टूबर 2025 सोमवार को सूर्यास्तगामी भगवान सूर्य को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। डूबते… Continue reading सर्व कल्याणकारी सूर्यदेव

मनोरंजन की पाठशाला: ‘थामा’

कहानी बेहद दिलचस्प है और पूरी फ़िल्म में दर्शकों को हिलने तक नहीं देती है। इंटरवल के बाद तो ये फ़िल्म हिंदी सिनेमा में मौजूद मनोरंजन की सभी परिभाषाओं की पुनर्परिभाषित करती नज़र आती है। पूरी कहानी बता कर मैं अपने पाठकों को इस फ़िल्म का दर्शक बनने से रोकना नहीं चाहता। सिने-सोहबत आज के… Continue reading मनोरंजन की पाठशाला: ‘थामा’

विश्वामित्र: पुरुषार्थ से ब्राह्मणत्व सिद्ध किया

विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है- सबके साथ मैत्री अथवा प्रेम। लेकिन वसिष्ठ द्वारा कामधेनु न देने पर उनसे शत्रुता, युद्ध और फिर पराजय की घटना के कारण वे अपकीर्ति के शिकार भी हुए। ऋग्वेद में अनेक मंत्रों से सिद्ध होता है कि विश्वामित्र यज्ञों में पुरोहित का कार्य करते… Continue reading विश्वामित्र: पुरुषार्थ से ब्राह्मणत्व सिद्ध किया

न्यायिक प्रक्रिया में सामंजस्य आवश्यक

कानून की प्रक्रिया एक श्रृंखला के समान है, जिसमें हर कड़ी की अपनी अहमियत है। पुलिस, वकील, गवाह और मुवक्किल, अगर इनमें से किसी ने भी अपना कर्तव्य ईमानदारी से नहीं निभाया, तो न्याय का पहिया अटक सकता है। वकीलों को चाहिए कि वे केवल तकनीकी जीत के लिए नहीं, बल्कि सच्चे न्याय के लिए… Continue reading न्यायिक प्रक्रिया में सामंजस्य आवश्यक

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