महाराष्ट्र सरकार ने 25 लाख परिवारों के लिए मुफ्त साड़ी योजना बंद की

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महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण अंत्योदय राशन कार्ड वाले लगभग 25 लाख परिवारों को मुफ्त साड़ी देने की योजना को बंद कर दी है।

कपड़ा विभाग के गुरुवार रात जारी इस आदेश से पता चलता है कि सरकार बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच राज्य-प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं में बड़ी कटौती कर रही है। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ‘एकीकृत और टिकाऊ कपड़ा नीति 2023-28’ के तहत शुरू हुयी इस योजना के दो उद्देश्य थे। एक, त्योहारों के मौसम में सबसे गरीब परिवारों को जरूरी मदद देना और दूसरा, महाराष्ट्र के संकटग्रस्त विद्युत करघा क्षेत्र के लिए एक तयशुदा बाजार देना।

पिछले तीन वर्षों 2023, 2024 और 2025 में सरकार ने दिवाली से पहले अंत्योदय परिवारों को विद्युतकरघा से बनी साड़ियां बांटने के लिए हर साल 100 करोड़ का रुपये का बजट रखा था। ताजा सरकारी आदेश से पुष्टि होती है कि यह कार्यक्रम मौजूदा वित्तीय वर्ष में जारी नहीं रहेगा। 

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कपड़ा विभाग के आदेश में राज्य की व्यापक आर्थिक बदहाली का हवाला देते हुए इस योजना को बंद करने का कारण बताया गया है। अधिकारियों ने कहा कि चल रही कई कल्याणकारी योजनाओं, बढ़ते प्रशासनिक खर्चों और अन्य जरूरी वित्तीय देनदारियों के कारण साड़ी वितरण जारी रखना ‘संभव नहीं’ रह गया है।

गौरतलब है कि यह कदम राज्य के कल्याणकारी खर्चों की कड़ी जांच-पड़ताल के बीच उठाया गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में ऐसी खबरें आई थीं कि हाल ही में हुई जांच-पड़ताल के दौरान ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन’ योजना से लगभग 92 लाख महिलाओं के नाम हटा दिए गए थे, जिससे राज्य-वित्तपोषित सामाजिक सहायता पहलों की स्थिरता को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस योजना के रद्द होने से राज्य के विद्युतकरघा उद्योग पर बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है।

योजना के लिए कपड़ा खरीदने की सरकारी प्रतिबद्धता खत्म होने से, वे बुनकर जो लगातार काम के लिए इस सालाना अनुबंध पर निर्भर थे, अब मांग में भारी कमी का सामना करेंगे। जुलाई 2026 तक राज्य सरकार ने उन परिवारों की मदद के लिए कोई वैकल्पिक उपाय नहीं बताया है जो इस सालाना त्योहार के तोहफे पर निर्भर थे। इससे 25 लाख परिवार उस लाभ से वंचित हो गए हैं, जो पिछले तीन सालों से उनकी दिवाली की खुशियों का अहम हिस्सा बन गया था।

Pic Credit : ANI


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