अत्यधिक गरीबी में गुजर कर रहे परिवारों की पहचान करेगा जम्मू कश्मीर

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जम्मू कश्मीर में अत्यधिक गरीबी में जीवन व्यतीत करने वाले परिवारों की पहचान करने के लिए पहली बार केंद्र-शासित प्रदेश ऐसे परिवारों की गिनती करेगा। इसका मकसद समावेशी शासन को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि कल्याणकारी योजनाएं सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचें।

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने बुधवार को योजना, विकास और निगरानी विभाग (पीडी एवं एमडी) की एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मकसद केंद्र-शासित प्रदेश में अत्यधिक गरीब परिवारों की प्रस्तावित परिवार-स्तर की गणना का प्रत्यक्ष जायजा लेना था।

ये ऐसे गरीब परिवार होते हैं जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के मामले में अभाव का सामना करते हैं। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि परिवारों की प्रस्तावित गिनती विकास यात्रा में अगला तार्किक कदम है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद उन परिवारों की पहचान करना है जो कई तरह की सुविधाओं से वंचित हैं। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से मान्य और प्रौद्योगिकी पर आधारित डेटाबेस बनाना है जिससे सरकारी विभाग अधिक सटीकता से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा सकें, विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पीछे न छूटे।

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डुल्लू ने कहा कि यह प्रस्तावित कवायद डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में पहला कदम है। इससे पूरे जम्मू कश्मीर में सुविधाओं से वंचित इलाकों की पहचान करने और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार होगा।

उन्होंने उपायुक्तों से कहा कि वे नियोजन विभाग के साथ मिलकर मानव संसाधन की जरूरतों का आकलन करें।

मुख्य सचिव ने विभाग को इन संसाधनों के लिए दक्षता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने का भी निर्देश दिया ताकि केंद्र शासित प्रदेश में जनगणना के दो चरणों (जिसमें जम्मू कश्मीर की खानाबदोश आबादी भी शामिल है) के पूरा होने के बाद यह कवायद शुरू की जा सके।

नियोजन, विकास एवं निगरानी विभाग की आयुक्त सचिव आर. एलिस वाज द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में एक वैज्ञानिक ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत सरकारी नियमों के अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के मामले में कई तरह की सुविधाओं से वंचित परिवारों की पहचान की जाएगी।

वाज ने कहा कि यह प्रस्ताव नीति आयोग द्वारा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से तैयार किए गए राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) ढांचे पर आधारित है जिसे जम्मू कश्मीर में गरीब परिवारों की पहचान के लिए तैयार किया गया है।

Pic Credit : ANI


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