बिहार सरकार ने एक नई पहल की है। अब 10वीं और 12वीं के छात्र फेल होंगे तो उनको फेल नहीं लिखा जाएगा। फेल की जगह पर लिखा जाएगा, ‘कौशल के लिए पात्र’। सवाल है कि क्या इसके बाद उसको किसी कौशल में प्रशिक्षित करने का काम होगा? क्योंकि अगर कौशल विकास का काम सरकार व्यापक स्तर पर नहीं करेगी तो इस पहल का कोई लाभ नहीं मिलेगा। ध्यान रहे अंक पत्र और प्रमाणपत्र में यह बदलाव बिहार बोर्ड के छात्रों के लिए होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई से 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले फेल होंगे तो उनके अंक पत्र में फेल ही लिखा जाएगा।
हालांकि कोशल विकास की योजना चलेगी तो दोनों के लिए चलेगी। दोनों को प्रशिक्षित किया जाएगा। बिहार सरकार की यह पहल नो फेल पॉलिसी की तरह नहीं है, जो कुछ समय पहले तक देश में लागू थी। कुछ समय पहले तक 10वीं कक्षा तक छात्रों को फेल नहीं किया जाता था। उनको फेल होने पर भी 10वीं तक प्रमोट किया जाता था। यह अलग किस्म का मामला है। असल में पिछले कुछ समय से भाजपा की सरकारें इस तरह के बदलाव करके फीलगुड का माहौल बना रही है। जैसे विकलांग को दिव्यांग कहा जाने लगा है। कुछ दिन पहले कहा गया था कि बेरोजगारों को आकांक्षी युवा कहा जाएगा। वैसे ही फेल होने पर ‘कौशल के लिए पात्र’ कहा जाएगा। इससे बच्चों के जीवन में क्या बदलता है यह देखना होगा।
