विजय और स्टालिन का फर्क

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सीपीआई के राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि टीवीके नेता विजय की शपथ में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ को बाद में बजाया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से तय प्रोटोकॉल के मुताबिक सबसे पहले तमिलनाडु का राज्य गीत आता है। उसको सबसे पहला स्थान दिया गया है। इसलिए मुख्यमंत्री की शपथ में भी पहले राज्य गीत बजना चाहिए और उसके बाद राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान होना चाहिए। वीरापांडियन ने इसकी ओर ध्यान दिलाने के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को एक चिट्ठी भी लिखी है। हो सकता है कि मुख्यमंत्री के साथ भी उनकी पार्टी यह मुद्दा उठाए। ध्यान रहे सीपीआई के दो विधायकों ने विजय की सरकार को बाहर से समर्थन दिया है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि यह पहली बार विवाद उठा। राज्य गीत पहले बजेगा या राष्ट्र गीत पहले गाया जाएगा इसका विवाद काफी समय से चलता है। डीएमके नेता एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री रहते हुए यह सुनिश्चित किया था कि राज्य गीत पहले बजाया जाए। राज्य सरकारों के कार्यक्रम में पहले राज्य गीत ही बजता था। यहां तक कि विधानसभा के सत्र के पहले दिन की कार्यवाही में भी इसी क्रम में सब कुछ होता था। इसके विरोध में पिछले राज्यपाल आरएन रवि इसी साल विधानसभा की कार्यवाही छोड़ कर चले गए थे। उन्होंने अभिभाषण नहीं पढ़ा था। वे चाहते थे कि पहले राष्ट्र गान बजे। एक तरफ स्टालिन का यह रवैया था तो दूसरी ओर विजय ने सब कुछ स्वाभाविक रूप से स्वीकार किया। आगे यह देखना होगा कि शपथ का दिन था इसलिए उन्होंने राज्य गीत और राष्ट्र गीत का क्रम स्वीकार कर लिया या आगे भी ऐसा ही होगा।


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