आमतौर पर भारत में विपक्ष हार का रोना रोता है और सत्तापक्ष जीत का जश्न मनाता है। विपक्ष चुनाव आयोग सहित सभी संस्थाओं, यहां तक कि स्पीकर के ऊपर भी पक्षपात के आरोप लगाता है और सरकार उनका बचाव करती है। विपक्ष धांधली और गड़बड़ी के आरोप लगाता है और सरकार सब कुछ ठीक होने का दावा करती है। विपक्ष प्रदर्शन करता है और सत्तापक्ष के लोग सत्ता की मौज लेते हैं। लेकिन अभी देश में एक अनोखी उलटबांसी देखने को मिल रही है। देश भर में सत्तापक्ष प्रदर्शन कर रहा है और विपक्ष को समझ ही नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। अब जाकर विपक्ष भी प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। लेकिन सत्तापक्ष ने प्रदर्शन के मामले में भी विपक्ष को पीछे छोड़ दिया है। देश भर में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसकी शुरुआत 18 मार्च की रात को संसद परिसर में ही हो गई थी। संसद में शाम सात बज कर 50 मिनट पर नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का बिल विफल हुआ था और 10 मिनट के अंदर भाजपा व एनडीए की दूसरी पार्टियों की महिला सांसद छपे हुए बैनर और तख्तियां लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन कर रही थीं। इसका अर्थ है कि पहले से तैयारी थी कि बिल फेल होगा और प्रदर्शन करना है।
उसके बाद उतने पर ही भाजपा ने बस नहीं किया। पूरे देश में प्रदर्शन की योजना बन गई। अलग अलग राज्य अपने यहां महिलाओं का आक्रोश मार्च निकाल रहे हैं। मंगलवार को उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने जन आक्रोश महिला पदयात्रा का नेतृत्व किया। बड़ी संख्या में महिलाएं इसमें शामिल हुईं। योगी आदित्यनाथ खुद आगे आगे चल रहे थे और साथ में तिरंगा झंडा लेकर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अन्य नेता चल रहे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने एक भाषण भी दिया और विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं को मिलने वाले अधिकार के रास्ते में बाधा डाली। मुख्यमंत्री ने जी भर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। इसी तरह का प्रदर्शन दूसरे राज्यों में भी हो रहा है। लखनऊ से पहले पटना में महिलाओं का प्रदर्शन हुआ, जिसमें भाजपा के बड़े नेता शामिल हुए।
भाजपा शासित कई राज्यों में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, जिसमें विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया जाएगा। दूसरी ओर विपक्ष अभी समझने में लगा है कि उसे क्या करना चाहिए। यह अलग बात है कि भाजपा को अपनी बात आम लोगों खास कर महिलाओं तक पहुंचाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि उसका नैरेटिव कमजोर है। विपक्ष का नैरेटिव मजबूत है। उसका कहना है कि सरकार अभी 543 सदस्यों की लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने का बिल ले आए तो उसे तुरंत पास करा दिया जाएगा। विपक्ष का स्टैंड बहुत स्पष्ट है। वह महिला आऱक्षण के पक्ष में लेकिन परिसीमन के खिलाफ है।
लेकिन इस बात को लेकर जनता के बीच जाने और चुनाव का नैरेटिव बनाने के लिए विपक्ष की ओर से कोई साझा प्रयास नहीं हो रहा है। अपने स्तर पर ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में माहौल बनाया तो तमिलनाडु में एमके स्टालिन ने अपना नैरेटिव स्थापित किया। लेकिन सबसे ज्यादा निशाने पर जो पार्टी है यानी कांग्रेस वह अभी अपनी योजना ही बनाने में लगी है कि उसे क्या करना है। हैरानी है कि विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक ने मिल कर संविधान संशोधन बिल को विफल कराया लेकिन उसके बाद भाजपा की ओर से बनाए जा रहे नैरेटिव का जवाब मिल कर नहीं दे रहा है। वह सारी पार्टियों अकेले कर रही हैं।
