महिला आरक्षण की आड़ में लाया गया परिसीमन का विधेयक संसद में पास नहीं हो सका। एकजुट विपक्ष ने सरकार को हरा दिया। उसके बाद से इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या महिला आरक्षण अब कई बरसों के लिए टल गया? ऐसा नहीं है। अगर सरकार पूरी प्रक्रिया में तेजी ले आए तो आसानी से 2029 के चुनाव में इसे लागू किया जा सकता है। असल में देरी का सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में जब नारी शक्ति वंदन कानून पास कराया था तभी महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन के साथ जोड़ दिया गया था। उसमें कहा गया था कि पहले जनगणना होगी और उसके बाद परिसीमन के जरिए सीटें बढ़ाई जाएंगी और तब महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा। लोकसभा की सीटें बढ़ाई जाएंगी, यह तो संसद की नई इमारत में 880 लोगों के बैठने की व्यवस्था से भी पता चल गया था। बहरहाल, अब चूंकि नया कानून पास नहीं हुआ है और सरकार ने पुराने कानून को लागू कर दिया है इसलिए यह कहा जा रहा है कि अब 2034 से पहले महिला आरक्षण नहीं लागू हो पाएगा।
लेकिन सितंबर 2023 में जो अनुमान लगाया जा रहा था उसमें बहुत कुछ बदल गया है। जैसे उस समय पता नहीं था कि जनगणना कब होगी। सरकार कह रही थी कि जल्दी से जल्दी जनगणना कराई जाएगी लेकिन तारीख तय नहीं थी। अब सब कुछ तय है। जनगणना का काम शुरू हो गया है। पहले दौर में मकानों की गिनती हो रही है। स्वगणना के जरिए लोग फॉर्म भर रहे हैं। बाद में जनगणना कर्मचारी उनकी गिनती करेंगे। अगले साल इंसानों की गिनती होगी। यह भी तय कर दिया गया है कि एक मार्च 2027 को आधी रात तक जन्मे लोगों को गिना जाएगा। यानी 2027 में इंसानों की गिनती हो जाएगी। चूंकि गिनती डिजिटल हो रही है इसलिए आंकड़े आने में कोई समय नहीं लगेगा। पहले सालों लगते थे लेकिन अब बहुत जल्दी अंतिम आंकड़े आ जाएंगे। सरकार चाहे तो अंतिम आंकड़े आने से पहले भी परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है।
ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में बनने वाले परिसीमन आयोग को बहुत काम करना होता है। उसे सिर्फ हर लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ मतदाताओं की संख्या निर्धारित नहीं करनी होती है, बल्कि भौगोलिक सीमा का निर्धारण भी करना होता है। वह काम जनगणना के अंतिम आंकड़े आने से पहले भी हो सकता है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों से आबादी का एक मोटा अनुमान सबको है और मतदाता सूची से पक्का अनुमान है कि एक क्षेत्र में कितने मतदाता हैं। इसलिए अगर सरकार तेजी लाती है और जनगणना का काम पूरा होते ही या उससे पहले भी परिसीमन आयोग का काम शुरू हो जाता है तो बड़ी आसानी से 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है। सरकार के पास परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों का फॉर्मूला तैयार है। लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ा कर 850 करनी है और उसमें एक तिहाई यानी करीब 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करनी है। अभी से सरकार के पास तीन साल का समय है। अप्रैल 2029 में लोकसभा का चुनाव होना है। उससे पहले सरकार चाहे तो परिसीमन करा कर महिला आरक्षण लागू कर सकती है। ऐसा लग रहा है कि सरकार चाहेगी क्योंकि उसे अगले चुनाव में यह मैसेज देना है कि विपक्ष के विरोध के बावजूद उसने महिला आरक्षण लागू किया और सीटें भी बढ़वाई।
