राहुल पांच साल के बाद बंगाल लौटे हैं

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कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में चुनावी सभा करने गए थे। बंगाल के नेता पांच साल से उनका इंतजार कर रहे थे। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने एकाध सभाएं की थीं। उसके बाद वे फिर किसी राजनीतिक मकसद से पश्चिम बंगाल नहीं गए। जिस समय राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे थे उस समय दूसरे चरण के दौरान वे बंगाल के उत्तरी हिस्से में दो या तीन मुस्लिम बहुल इलाकों से गुजरे थे। उसी समय वे बिहार से भी गुजरे और उसके भी मुस्लिम बहुल इलाकों में उनका कार्यक्रम हुआ। राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल नहीं गए। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी भले विपक्षी गठबंधन से अलग थीं लेकिन अगर कांग्रेस जोर लगा कर लड़ती और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा की जनसभाएं होतीं तो हो सकता है कि ममता को नुकसान होता। यह अखिल भारतीय राजनीति के लिए ठीक नहीं होता। इसलिए राहुल नहीं गए।

अब सवाल है कि इस बार प्रचार के लिए गए तो फिर ममता बनर्जी ही निशाने पर क्यों हैं? अगर भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस सोच रही है कि ममता का मजबूत रहना जरूरी है तो इस बार जाकर ममता पर हमले का क्या कारण है? राहुल ने अपनी सभा में कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने भाजपा के लिए रास्ता बनाया। यानी भाजपा अगर राज्य में मजबूत हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार ममता बनर्जी हैं। कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि राहुल गांधी ने अगर यही प्रचार पहले से किया होता और पिछले पांच साल में पार्टी को मजबूत करने के लिए राज्य में काम किया होता तो कांग्रेस की स्थिति बेहतर होती। जैसे ही भाजपा मजबूत हुई वैसे ही कांग्रेस को भी बंगाल में काम करना चाहिए था। लेकिन राहुल गांधी न तो संगठन के कामकाज के लिए बंगाल गए और न चुनाव के लिए। इसके बावजूद कांग्रेस को इस बार चुनाव में खाता खुलने की संभावना दिख रही है।


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