कांग्रेस विधायक विश्वसनीय क्यों नहीं हैं?

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किसी जमाने में विधायकों को छिपाने के लिए रिसॉर्ट राजनीति की शुरुआत गुजरात से हुई थी और भाजपा के विधायकों को खजुराहो में छिपाया गया है। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। जब से गुजरात के दो नेताओं ने भाजपा की कमान संभाली है तब से भाजपा के विधायकों को छिपाने या रिसॉर्ट में ले जाने की जरुरत नहीं पड़ती है, बल्कि बाकी दूसरी पार्टियों के विधायकों को ही भाजपा से बचाना होगा। हर जगह ऑपरेशन लोटस की चर्चा होती है। इसमें भी सबसे अविश्वसनीय मामला कांग्रेस विधायकों का होता है। हर बार राज्यसभा चुनाव में कहीं न कहीं ऐसा होता है कि कांग्रेस को अपने विधायकों को ले जाकर रिसॉर्ट में रखना होता है। पिछले दोवार्षिक चुनाव के समय बिहार कांग्रेस के विधायकों को दक्षिण भारत की सैर पर ले जाया गया था। इस बार ओडिशा और हरियाणा के विधायकों को राज्य से हटाया गया है और तय किया गया है कि सोमवार, 16 मार्च को चुनाव के समय ही उनको लाया जाएगा।

ओडिशा में कांग्रेस के 14 विधायक हैं उनको बेंगलुरू ले जाया गया है। गौरतलब है कि ओडिशा में चौथी सीट के लिए पांचवें उम्मीदवार के तौर पर निर्दलीय दिलीप रे ने नामांकन कर दिया है। वे बड़े कारोबारी हैं और कोयला मंत्री रहे हैं। चौथी सीट पर बीजद के डॉक्टर दत्तेश्वर होता चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने उनको समर्थन देने का वादा किया है। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 30 वोट की जरुरत है। बीजद के पहले उम्मीदवार के जीतने के बाद उसके पास 18 वोट बचते हैं। कांग्रेस का 14 वोट मिल जाए तो डॉक्टर होता आराम से जीत जाएंगे। लेकिन उससे पहले दिलीप रे और भाजपा के प्रबंधकों से बचाने के लिए कांग्रेस के विधायक बेंगलुरू भेजे गए हैं।

हरियाणा में लग रहा था कि इस बार ऐसा नहीं करना होगा क्योंकि राज्य में दो सीटों पर चुनाव है और एक सीट जीतने के लिए 30 वोट की जरुरत है। कांग्रेस के पास अपने 37 विधायक हैं। लेकिन जैसे ही राहुल गांधी ने करमबीर बौद्ध नाम के उम्मीदवार का आविष्कार किया वैसे ही मामला बिगड़ गया है। भाजपा ने बड़े कारोबारी सतीश नंदल को समर्थन देकर उम्मीदवार बना दिया। पहले दो बार हरियाणा में कांग्रेस विधायक गड़बड़ी कर चुके हैं। कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट अवैध करने से आरके आनंद हारे थे और सुभाष चंद्र की जीत हुई थी। ऐसे ही कांग्रेस की किरण चौधरी की क्रॉस वोटिंग से अजय माकन हारे थे और कार्तिकेय शर्मा जीते थे। इस बार भी ऐसा न हो जाए इसके लिए कांग्रेस विधायकों को हिमाचल प्रदेश के कुफरी भेजा गया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद चंडीगढ़ में बैठ कर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। दीपेंद्र हुड्डा विधायकों के साथ हैं।


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