बिहार में भले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और जनता दल यू गठबंधन का नेतृत्व करने वाली पार्टी है लेकिन सरकार में सिर्फ भाजपा का एजेंडा चल रहा है। जनता दल यू की ओर से कोई नेता ऐसा नहीं है, जो इसका विरोध कर सके। ऐसी बातें हो रही हैं, जैसी बिहार में कभी नहीं हुईं। यहां तक कि भाजपा के नेता भी पहले जो बातें कहने की हिम्मत नहीं करते थे वैसी बातें कही जा रही हैं। जाहिर है कि भाजपा के नेता अब सरकार को अपनी मानने लगे हैं और उनको पता है कि नीतीश कुमार को कोई सुध बुध नहीं है कि राज्य में क्या हो रहा है। यह नीतीश के करीबी नेताओं और मुख्यमंत्री आवास में बनाए गए सपोर्ट सिस्टम की कमजोरी है, जो कोई सवाल नहीं उठा रहा है। यहां तक कि बिहार के बंटवारे की बात हो गई और जनता दल यू की ओर से कोई सवाल नहीं उठा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के तीन दिन के दौरे पर गए तो वे सीमांचल में रहे। वहां बिहार के पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों को अलग करके पश्चिम बंगाल के कुछ जिले मिला कर अलग राज्य बनाने की बात हुई।
बहरहाल, बिहार के उप मुख्यमंत्री सह भूमि विकास और राजस्व मंत्री विजय सिन्हा ने पिछले दिनों ऐलान किया कि बिहार में खुले में मांस, मछली आदि की बिक्री बंद होगी। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अनायास यह बयान दे दिया। असल में भाजपा थाह ले रही है कि जनता दल यू ऐसी किसी बात का विरोध करती है या नहीं। अगर नीतीश कुमार अपने बेस्ट ऑफ माइंड में होते तो ऐसी बातें कोई नहीं करता। सोचें, बिहार देश में सबसे ज्यादा मांसाहार वाले राज्यों में शामिल है। पश्चिम बंगाल, केरल या जम्मू कश्मीर जैसे कुछ राज्य ही मांसाहार में बिहार से आगे होंगे। बिहार की लगभग 80 फीसदी आबादी मांसाहार करती है। इसके धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों कारण हैं। लेकिन सारे देश को वैष्णव बनाने के प्रोजेक्ट में भाजपा के एक नेता ने इसको नियंत्रित करने का ऐलान किया। इससे किसी को आपत्ति नहीं हो सकती है कि मांस की बिक्री के लिए लाइसेंस दिया जाना चाहिए और स्वच्छता, गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन उससे पहले सरकार को इसके लिए व्यवस्था बनानी होगी।
इसी तरह उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने यह भी ऐलान किया कि बिहार सरकार गौहत्या पर पाबंदी लगाने का कानून बनाने पर विचार कर रही है। ध्यान रहे बिहार में कभी भी यह मुद्दा नहीं रहा है। नीतीश कुमार पिछले 21 साल से सरकार चला रहे हैं। नौ महीने के जीतन राम मांझी के कार्यकाल को छोड़ दें तो नीतीश ही मुख्यमंत्री रहे और तीन साल के राजद के साथ को छोड़ दें तो वे ज्यादातर समय भाजपा के साथ ही सरकार में रहे। लेकिन कभी इस किस्म के मुद्दे नहीं उठे। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील कोई भी मुद्दा नीतीश ने किसी को उठाने नहीं दिया। रामनवमी, दुर्गापूजा या मोहर्रम के समय छिटपुट सांप्रदायिक हिंसा हुई लेकिन नीतीश की सरकार ने कभी दंगा नहीं भड़कने दिया। भाजपा के साथ रहते हुए भी वे मुस्लिम समुदाय के लिए काम करते रहे। उन्होंने अपनी सरकार में हमेशा मुस्लिम मंत्री बनाए। लेकिन चूंकि वे अभी कोई फैसला करने की स्थिति में नहीं हैं तो भाजपा अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में लग गई है। जदयू के नेता अपने स्वार्थ और सत्तालोलुपता में कुछ नहीं बोलते हैं। जहां तक मांसाहार की बात है तो चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को भी इस मामले पर बोलना चाहिए था। लेकिन वो दोनों पार्टियां भी चुप्पी साधे हुए हैं।
