केजरीवाल को सारी सुविधाएं मिलेंगी

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इन दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर जनसभा करने की अनुमति हासिल करना बहुत मुश्किल काम है। दिल्ली पुलिस ने काफी पहले जंतर मंतर का बड़ा इलाका खाली करा लिया। स्थायी प्रदर्शनों को हटा दिया गया। अब छोटे मोटे प्रदर्शनों की ही इजाजत वहां मिलती है। लेकिन अरविंद केजरीवाल को बड़ी रैली करने की इजाजत मिल गई। हालांकि पहले रूटीन में दिल्ली पुलिस ने रैली करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। लेकिन बाद में पता नहीं क्या हुआ कि इजाजत दे दी गई। दिल्ली पुलिस की इजाजत मिलने के बाद केजरीवाल ने वही जंतर मंतर पर बड़ी रैली की। गौरतलब है कि केजरीवाल ने जंतर मंतर से ही अपनी राजनीति शुरू की थी और दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार को हरा कर सरकार बनाई थी। अब वे फिर जंतर मंतर पर लौटे हैं।

असल में केजरीवाल को तत्काल रैली करनी थी। दिल्ली की विशेष अदालत ने शुक्रवार को उनको खराब नीति घोटाले में बरी किया था। उसके बाद जो भावना का ज्वार आया उसे भुनाने के लिए केजरीवाल को तुरंत रैली करने की जरुरत थी। रामलीला मैदान की रैली इतनी जल्दी नहीं हो सकती थी क्योंकि वहां भीड़ जुटाने के लिए कई तरह के बंदोबस्त की जरुरत पड़ती। लेकिन जंतर मंतर पर रैली आसान थी। सो, उन्होंने मंजूरी मांगी और थोड़ी ना नुकुर के बाद दिल्ली पुलिस ने मंजूरी दे दी। इस समय केजरीवाल जो भी मांगेंगा वह उनको मिलेगा क्योंकि अगले साल होने वाले सात राज्यों के चुनावों से पहले केजरीवाल को भाजपा विरोधी बड़ी ताकत के तौर पर स्थापित करना है। साथ ही कांग्रेस पार्टी और उसके इकोसिस्टम की ओर से बनाए जा रहे इस नैरेटिव को ध्वस्त करना है कि राहुल गांधी सबसे साहसी नेता हैं, मोदी पर हमला कर रहे हैं और इसलिए भाजपा से लड़ने वाला विपक्ष का चेहरे वे ही हैं। भाजपा चाहेगी कि केजरीवाल का चेहरा भी उभरे ताकि विपक्षी गठबंधन में फूट पड़े। कांग्रेस को इसका नुकसान अगले साल पंजाब, गोवा और गुजरात में होगा तो उसके बाद राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी भी प्रभावित होगी।


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