चुनावी राज्यों से बाहर कांग्रेस की रैली!

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यह लाख टके का सवाल है, जो दिल्ली में नहीं, बल्कि चुनावी राज्यों की राजधानियों में पूछा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी चुनाव कैसे लड़ेगी और चुनाव की घोषणा से पहले कांग्रेस के पास क्या योजना है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस ने भारत और अमेरिका व्यापार संधि के खिलाफ प्रदर्शन और रैलियों की जो घोषणा की है उसमें किसी चुनावी राज्य का नाम नहीं है। राहुल गांधी अक्सर ऐसा करते हैं। 2025 के अंत में अकेले बिहार में विधानसभा का चुनाव था लेकिन राहुल गांधी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाने वाले एटम बम फोड़ने के लिए उन्होंने का चुनाव किया था। हालांकि बाद में वे बिहार गए।

बहरहाल, एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव का आगाज कर दिया है। उसके बड़े नेताओं की कई कई रैलियां चुनावी राज्यों में हो चुकी है। लेकिन कांग्रेस ने अभी तक छिटपुट कार्यक्रमों के अलावा कोई तैयारी नहीं दिखाई है। प्रियंका गांधी वाड्रा असम के दौरे पर गईं तो कांग्रेस में जान लौटी। हालांकि अपनी पुरानी रणनीति के तहत भाजपा ने उनकी यात्रा को पंक्चर करने के लिए ऐन यात्रा के समय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। इसके बावजूद प्रियंका की मौजूदगी ने भाजपा के नैरेटिव को कमजोर किया और कांग्रेस समर्थकों के अंदर जान फूंकी। इसका असर चुनाव तैयारियों पर दिख रहा है।

लेकिन एक तो राहुल गांधी के दौरे नहीं हो रहे हैं और दूसरे कांग्रेस ने भारत और अमेरिका की व्यापार संधि के खिलाफ आंदोलन की जो रूपरेखा बनाई है उसमें चुनावी राज्यों को ही छोड़ दिया है। कांग्रेस पार्टी की पहली रैली मंगलवार, 24 फरवरी को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हो रही है। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों रैली में हिस्सा लेंगे। इसके बाद पांच और राज्यों में कांग्रेस की रैलियां होंगी। कांग्रेस ने भारत और अमेरिका की व्यापार संधि के विरोध में रैली करने के लिए जिन राज्यों का चयन किया है उनमें मध्य प्रदेश के अलावा बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इनमें से किसी राज्य में अभी चुनाव नहीं हैं। सबसे नजदीकी चुनाव हिमाचल प्रदेश का है, जहां अगले साल यानी 2027 के अंत में गुजरात के साथ चुनाव होगा।

यह सही है कि इन राज्यों में किसानों की आबादी बहुत है और केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ जो संधि की है या संधि की जो शर्तें सामने आई हैं उनसे ऐसा लग रहा है कि इन राज्यों के किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब के किसान प्रभावित होंगे तो महाराष्ट्र के कपास के किसानों पर भी असर पड़ेगा। इसलिए कांग्रेस ने व्यापार संधि के खिलाफ किसान रैली करने के लिए इन राज्यों का चयन किया। लेकिन इन राज्यों के साथ साथ कांग्रेस उन राज्यों को भी फोकस कर सकती थी, जहां अभी चुनाव होने वाले हैं। चुनाव की घोषणा में दो हफ्ते का समय रह गया है। लेकिन कांग्रेस ने किसी चुनावी राज्य में इस सौदे को लेकर प्रदर्शन या रैली का फैसला नहीं किया। क्या कांग्रेस पार्टी भारत और अमेरिका के समझौते में कोई ऐसा पहलू नहीं खोज पाई, जो पांच चुनावी राज्यों से जुड़ा हो? अमेरिकी टैरिफ से दक्षिण के राज्य बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और अमेरिका की वीजा नीतियों के कारण भी दक्षिण के राज्यों के छात्र व पेशेवर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ऐसे किसी मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस तमिलनाडु या केरल में कोई रैली कर सकती थी। लेकिन कांग्रेस ने चुनावी राज्यों को तो छोड़िए उनके आसपास के किसी राज्य में भी प्रदर्शन का फैसला नहीं किया है।


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