कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को वैसे तो असम में सिर्फ टिकट बंटवारे के काम में लगाया गया है। लेकिन वे चुनाव की रणनीति बनाती भी दिख रही हैं। कम से कम टिकट बंटवारे के लिए या संभावित उम्मीदवारों की छंटनी के लिए ही उन्होंने जो तरीका निकाला है उससे कांग्रेस का चुनावी माहौल बन रहा है। ध्यान रहे प्रियंका को असम के लिए छंटनी समिति का प्रमुख बनाया गया है। आमतौर पर नेहरू-गांधी परिवार के किसी सदस्य को इतनी छोटी जिम्मेदारी नहीं मिलती है। उनको कहीं भी जाकर किसी भी तरह की राजनीति करने की छूट होती है और किसी बात की जिम्मेदारी नहीं होती है। लेकिन प्रियंका को असम में जिम्मेदारी में बांधा गया है और वे बड़ी शिद्दत से इस जिम्मेदारी को निभा भी रही हैं।
प्रियंका ने छंटनी समिति के काम को सचमुच गंभीरता से लिया है। वे बिल्कुल ग्राउंड से रिपोर्ट ले रही हैं। उन्होंने जिला व प्रखंड समितियों से नाम मांगे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों को संगठन की बिल्कुल छोटी ईकाई से बात करने और उनकी राय लेने के काम में लगाया है। उन्होंने अपने भरोसे के कई लोगों को अलग अलग क्षेत्रों में भेजा है। खबर है कि सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को मुस्लिम बहुल इलाकों में भेजा गया। ऐसे ही सप्तगिरी शंकर उलाका को भी आदिवासी बहुलता वाले इलाकों में प्रियंका ने भेजा। वे इन नेताओं के जरिए जमीनी रिपोर्ट ले रही हैं और जीत सकने लायक उम्मीदवारों का चयन कर रही है। सोचें, प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई हैं और प्रभारी जितेंद्र सिंह हैं। ये दोनों राहुल व प्रियंका के बहुत करीब हैं। फिर भी प्रियंका सिर्फ इनकी रिपोर्ट पर भरोसा करके काम नहीं कर रही हैं। अगर असम में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसका कुछ श्रेय प्रियंका को जरूर मिलेगा।
