ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी जो काम मनरेगा बचाओ आंदोलन में नहीं कर पाई वह अमेरिका के साथ व्यापार संधि के मामले में करना चाहती है। राहुल गांधी ने इसका माहौल बना दिया है। उन्होंने चार दिन तक लगातार सोशल मीडिया में व्यापार संधि की शर्तों को लेकर सरकार पर हमला किया। राहुल ने सबसे ज्यादा किसानों के मुद्दे पर फोकस किया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि मजदूरों में वैसी एकता नहीं है, जैसी किसानों में है। किसानों ने केंद्र सरकार के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस कराया। उसके बाद केंद्र सरकार ने किसानों से जो वादा किया उसे आज तक पूरा नहीं किया गया है, जबकि चार साल बीत गए। दूसरी बात यह है कि किसानों संगठनों ने 12 फरवरी के भारत बंद में हिस्सा लिया था और वे भी मान रहे हैं कि अमेरिका के साथ हुई व्यापार संधि से किसानों को नुकसान हो सकता है। तभी कांग्रेस पार्टी इस संधि के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।
बताया जा रहा है कि मार्च में कांग्रेस इस प्रदर्शन का ऐलान कर सकती है। ध्यान रहे मार्च में ही इस व्यापार सौदे पर दोनों देश दस्तखत करने वाले हैं। अभी तक तो फ्रेमवर्क और फैक्टशीट पर बात हो रही है। मार्च के मध्य में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। उससे पहले कांग्रेस इस मसले पर आंदोलन की रूपरेखा बनाने के लिए पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेगी। खबर है कि इस सिलसिले में पहली बैठक 20 फरवरी को होने वाली है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ख़ड़गे और पार्टी के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी पांच या छह राज्यों के किसानों से मिलेंगे। बताया जा रहा है कि पहले चरण में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के पार्टी नेताओं से राहुल गांधी और ख़डगे की मुलाकात होगी। ध्यान रहे राहुल ने सबसे पहले कपास किसानों का मुद्दा उठाया था। इस लिहाज से महाराष्ट्र के नेताओं से उनके मिलने का संदर्भ समझ में आ रहा है। बाकी राज्य भी खेती किसानी वाले राज्य है। अमेरिका व न्यूजीलैंड के सेब के लिए भारत का बाजार खोलने से सेब उत्पादक भी परेशान हैं। तभी हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में आंदोलन की तैयारी हो रही है।
बहरहाल, नौ मार्च को संसद के बजट सत्र का दूसरा हिस्सा शुरू होगा तो पहले दिन स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी और वोटिंग होगी। इसका फेल होना तय है। लेकिन उसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ लाए गए सब्सटेंसिव मोशन का मुद्दा आएगा। यह मोशन भाजपा के एक सांसद ने राहुल गांधी के खिलाफ इसलिए पेश किया क्योंकि उन्होंने भारत और अमेरिका व्यापार संधि की खबर आने के बाद संसद में कहा था कि सरकार ने देश बेच दिया है। राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान इस सौदे का मुद्दा उठाया था और यह भी कहा था कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया है।
राहुल ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से राष्ट्री.य सुहक्षा का मामला भी उठाया था। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि जिस समय सत्र चल रहा होगा उसी समय भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर दस्तखत होंगे। उसी समय डील को लेकर राहुल की ओर से लगाए गए आरोपों का मुद्दा भी संसद में उठेगा और उसी के आसपास कांग्रेस देश भर में आंदोलन की तैयारी कर रही है। कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि मनरेगा बचाओ अभियान में कांग्रेस ने तैयारी नहीं की थी। दूसरे, मजदूर बहुत संगठित भी नहीं हैं। इसलिए वह अभियान फेल हो गया। लेकिन किसानों को केंद्र में रख कर व्यापार संधि के खिलाफ आंदोलन से कांग्रेस को उम्मीद है।
