भारतीय जनता पार्टी के संगठन में इस बार जो बदलाव होगा वह सिर्फ दिखावे वाला नहीं होगा। ध्यान रहे इससे पहले पिछले 12 साल में पार्टी का संगठन बहुत नहीं बदला है। अमित शाह ने अध्यक्ष बनने के बाद जो टीम बनाई थी उस टीम के लोग हर जगह दिखाई देते हैं। पार्टी के महामंत्री से लेकर नरेंद्र मोदी की सरकार और राज्यों के संगठन व सरकार में ऐसे चेहरे दिखेंगे, जो 12 साल पहले आगे लाए गए थे। अमित शाह की टीम को ही मोटे तौर पर जेपी नड्डा ने बनाए रखा और अपने छह साल के कार्यकाल में कुछ नए चेहरे जोड़े। अब कहा जा रहा है कि नितिन नबीन की टीम में बिल्कुल नए चेहरे होंगे। बताया जा रहा है कि संसदीय बोर्ड में फेरबदल होगी। असल में संसदीय बोर्ड में कुछ पदेन सदस्य होते हैं। पार्टी अध्यक्ष के साथ पूर्व अध्यक्ष और दोनों सदनों के नेताओं को इसमें जगह मिलती है। इस नाते नितिन नबीन, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष पदेन सदस्य हैं।
इनके अलावा जो सदस्य हैं उनमें बीएस येदियुरप्पा, सुधा यादव, इकबाल सिंह लालपुरा, सत्यनारायण जटिया, के लक्ष्मण और सर्बानंद सोनोवाल सदस्य हैं। के लक्ष्मण को ओबीसी चेहरे के तौर पर रखा गया है। माना जा रहा है कि वे और सोनोवाल पद पर बने रहेंगे। उनके अलावा येदियुरप्पा, लालपुरा, सुधा यादव और जटिया की जगह नए चेहरे आ सकते हैं। आमतौर पर राज्यों के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्रियों को पार्टी में उपाध्यक्ष बनाया जाता है। हालांकि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों में सिर्फ वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष हैं। वे वरिष्ठ नेता हैं पर उनके पास कोई जिम्मेदारी नहीं है। कहा जा रहा है कि पुराने और बुजुर्ग नेताओं को दिखावे के लिए उपाध्यक्ष का पद देकर बैठाने की बजाय नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि उनसे काम कराया जा सके। उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे बड़े नेताओं में सौदान सिंह, बैजयंत जय पांडा, सरोज पांडे आदि हैं। इनके अलावा डीके अरुणा, अब्दुल्ला कुट्टी, तारिक मंसूर, लक्ष्मीकांत बाजपेयी, लता उसेंडी, रेखा वर्मा आदि उपाध्यक्ष हैं। कहा जा रहा है कि प्रकाश जावडेकर की उपाध्यक्ष के रूप में वापसी हो सकती है।
