उत्तर भारत में ज्यादातर लोग आर श्रीलेखा का नाम नहीं जानते होंगे। वे केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं और वे केरल की पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी रही हैं। वे भारतीय जनता पार्टी की राजनीति करती हैं। पिछले दिनों केरल के स्थानीय निकायों के चुनाव में सबसे ज्यादा जिस नतीजे की चर्चा हुई थी वह तिरूवनंतपुरम शहरी निकाय में भाजपा की जीत की थी। पहली बार तिरूवनंतपुरम के 101 वार्डों में से 50 में भाजपा जीती। पहली बार केरल के किसी शहर में भाजपा का मेयर बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद चिट्ठी लिख कर इस जीत के लिए केरल के लोगों को बधाई और धन्यवाद दी थी। उस नतीजे के कई दिन बाद श्रीलेखा ने अपना दर्द बयान किया है।
आर श्रीलेखा ने कहा है कि चुनाव से पहले भाजपा की ओर से उनसे वादा किया गया था कि भाजपा जीती तो उनको तिरूवनतंपुरम का मेयर बनाया जाएगा। श्रीलेखा ने कहा है कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहती थीं। जाहिर है कि डीजीपी स्तर का अधिकारी रहा कोई व्यक्ति वार्ड काउंसिलर का चुनाव क्यों लड़ना चाहेगा। लेकिन वे इसलिए लड़ीं क्योंकि भाजपा ने उनसे वादा किया कि उनको तिरूवनंतपुरम का मेयर बनाया जाएगा। वे भाजपा का चेहरा थीं, प्रदेश उपाध्यक्ष थीं और पार्टी ने उनको कम से कम 10 वार्ड में जीत सुनिश्चित करने का जिम्मा दिया था। इसलिए वे पूरे भरोसे में थीं कि उनको मेयर बनाया जाएगा। लेकिन नतीजों के बाद भाजपा ने वीवी राजेश को मेयर बना दिया। श्रीलेखा ने कहा है कि आखिरी मिनट में किसी कारण से फैसला बदला गया। अब वे अपने को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं।
