बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने महिलाओं को मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपए देने शुरू किए तो राज्य में पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदल गया था। उस समय बिहार की बेलागंज सीट से एक राजद नेता का एक वीडिया वायरल हुआ था, जिसमें दिल्ली से गए एक बड़े पत्रकार से बातचीत में कह रहे थे कि घर की महिला कैसे परिवार से बाहर जाकर नीतीश कुमार को वोट करेगी। अगर महिला ने नीतीश को वोट करने की सोची तो उसकी पिटाई होगी। इस वीडियो ने राजद को बहुत नुकसान किया। लेकिन इससे यह भी पता चला था कि बिहार की महिलाएं जाति से अलग हट कर नीतीश कुमार के लिए वोट कर रही थीं।
बिल्कुल ऐसी ही स्थिति पश्चिम बंगाल में दिख रही है। भाजपा के एक नेता और राज्य समिति के सदस्य कालीपद सेनगुप्ता का एक बयान वायरल हो रहा है, जिसमें वे कह रहे हैं कि महिलाएं ममता बनर्जी की लक्ष्मीर भंडार योजना से प्रभावित होकर उनको वोट करेंगी इसलिए वोटिंग के दिन महिलाओं को घरों में बंद कर देना चाहिए। उनका यह बयान भाजपा का डर दिखाता है। असल में ममता बनर्जी की सरकार 2021 से यह योजना चला रही है, जिसमें महिलाओं को हर महीने नकद पैसे मिलते हैं। एससी और एसटी समुदाय की महिलाओं को 12 सौ रुपए और अन्य महिलाओं को एक हजार रुपए मिलते हैं। इसका असर लाड़ली बहना या मइया सम्मान योजना की तरह है। ऊपर से बंगाल में मातृशक्ति की पूजा होती है, जिसमें भाजपा अक्सर कमजोर पड़ जाती है। बहरहाल, लक्ष्मीर भंडार के अलावा भी महिलाओं के सशक्तिकरण की कई योजनाएं ममता सरकार चलाती है। इससे भाजपा को चिंता हो रही है कि महिलाएं जाति, धर्म से ऊपर उठ कर ममता की पार्टी को वोट कर सकती हैं।
