दक्षिण भारत के राज्यों में ज्यादा बच्चे पैदा करने की मुहिम जोर पकड़ने वाली है। ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील या तो आरएसएस और भाजपा के नेता कर रहे हैं या फिर दक्षिण भारत के राज्यों के नेता कर रहे हैं। संघ और भाजपा के नेता तो सिर्फ हिंदुओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील कर रहे हैं लेकिन दक्षिण भारत के नेता सभी नागरिकों से ऐसी अपील कर रहे हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने खुल कर अपने राज्य के लोगों से आबादी बढ़ाने को कहा ताकि लोकसभा सीटों के परिसीमन की स्थिति में कम आबादी के कारण दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं उठाना पड़े। हालांकि केंद्र सरकार ने कह दिया है कि सीटों की संख्या में प्रो राटा बेसिस पर बढ़ोतरी होगी। यानी अगर उत्तर भारत के किसी राज्य में 20 फीसदी सीटें बढ़ती हैं तो दक्षिणी राज्यों में भी उतनी ही सीटें बढ़ेंगी।
बहरहाल, आबादी बढ़ाने की इस मुहिम में कांग्रेस की तेलंगाना सरकार भी शामिल हो गई है। तेलंगाना सरकार ने दो से ज्यादा बच्चे होने पर स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं लड़ने वाले कानून को समाप्त कर दिया है। पहले यह नियम था कि जिनके दो से ज्यादा बच्चे होते थे वे पंचायतों के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में प्रजनन दर 1.7 फीसदी के आसपास है, जबकि रिप्लेसमेंट रेट 2.1 फीसदी है। प्रजनन दर दो फीसदी से नीचे जाने का मतलब है कि आबादी घट रही है। इस चिंता में तेलंगाना सरकार ने इस विधानसभा में एक प्रस्ताव लाकर पुराने कानून को रद्द कर दिया है। अब कहा जा रहा है कि सरकार आबादी बढ़ाने के लिए कुछ प्रोत्साहन की योजना भी शुरू करने वाली है।
