एक समय सत्ता में रही या बड़ी पार्टी रही प्रादेशिक पार्टियों में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति सबसे खराब है। उसके पास लोकसभा में एक भी सांसद नहीं है और उत्तर प्रदेश विधानसभा में सिर्फ एक विधायक हैं। राज्यसभा में भी सिर्फ एक सदस्य हैं, जो अप्रैल में रिटायर हो जाएंगे। माना जा रहा है कि कई पार्टियां ऐसी हैं, जिनकी आने वाले दिनों में यह गति हो सकती है। ऐसी पार्टियों में बीजू जनता दल और जनता दल यू का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है और इसका कारण यह है कि इन दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने न तो अपना उत्तराधिकारी चुना और न पार्टी में दूसरी लाइन का नेतृत्व तैयार किया है, जो सहज रूप से कमान संभाल ले। जिन पार्टियों ने ऐसा कर दिया वो सर्वाइव कर रही हैं।
पिछले दिनों बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन उसके बाद से ही उनकी पार्टी के भविष्य पर सवाल उठने लगे। तभी पार्टी की ओर से उनके बेटे निशांत को आगे लाने की चर्चा चली। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ऐलान किया कि जनता दल यू अगले एक सौ साल तक बिहार की जनता की सेवा करती रहेगी। उन्होंने यह मैसेज देना चाहा कि पार्टी का अस्तित्व खतरे में नहीं है। इसी तरह की चर्चा उधर बीजू जनता दल को लेकर भी हो रही थी। नवीन पटनायक की सेहत ठीक नहीं है और चुनाव हारने के बाद से पार्टी नेताओं के इस्तीफा देने का सिलसिला चल रहा है। तभी नवीन पटनायक ने संजय झा वाली बात दोहराई और कहा कि बीजू जनता दल एक सौ साल तक ओडिशा की जनता की सेवा करती रहेगी। हालांकि सिर्फ दावा करने से कुछ नहीं होगा। अगर पार्टी बचानी है तो नेतृत्व सामने लाना होगा।
