सरकार ने जरूरी मुद्दे छोड़ दिए

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संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदूषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने इस पर चर्चा नहीं कराई। उलटे सत्र खत्म हुआ तो सरकार की ओर से कहा गया कि कांग्रेस चर्चा नहीं चाहती थी। सोचें, कांग्रेस तो वंदे मातरम् पर भी चर्चा नहीं चाहती थी लेकिन सरकार ने कराई। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां मनरेगा की जगह विकसित भारत जी राम जी बिल का भी विरोध कर रही थीं लेकिन सरकार ने आधी रात तक चर्चा करा कर इसे पास कराया। फिर प्रदूषण पर चर्चा नहीं होने की जिम्मेदारी किसकी है?

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान दिल्ली की हवा खतरनाक श्रेणी में रही लेकिन एक बार भी प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा और न संसद में सरकार ने इस पर कोई बात की। रुपया गिरता जा रहा है और सत्र के दौरान ही एक डॉलर की कीमत 91 रुपए से ऊपर पहुंच गई थी। लेकिन यह मुद्दा भी नहीं उठा। इस पर भी चर्चा नहीं हुई। उत्तर प्रदेश में नकली कफ सिरप के मुद्दे पर बवाल मचा है लेकिन संसद में कोई चर्चा नहीं है। सत्र शुरू होने से पहले राजधानी दिल्ली में लाल किले के सामने कार बम धमाका हुआ और इतने बड़े व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का खुलासा हुआ। सत्र के बीच संसद पर हमले की बरसी आई, कम से कम उसी बहाने सुरक्षा और आतंकवाद पर चर्चा करते। लेकिन किसी ने वह मुद्दा भी नहीं उठाया।


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