ऐसा लग रहा है कि बिहार का विधानसभा चुनाव मोकामा में लड़ा जा रहा है। किसी ने सोशल मीडिया में लिखा कि अगर मोकामा में एयरपोर्ट होता तो देश के सारे पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सीधे वही उतरते। मजबूरी है, जो पटना में उतर कर मोकामा जाना पड़ रहा है। मोकामा तीर्थ बना हुआ है। देश के नक्शे में जिन लोगों को पहले बिहार नहीं मिलता था उनको भी मोकामा मिल जा रहा है। बिहार में कुल जितने उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं उससे ज्यादा पत्रकार अकेले मोकामा का चुनाव कवर कर रहे हैं। चारों तरफ मेला लगा हुआ है। सारी गाड़ियां मोकामा जा रही हैं। सबको लग रहा है कि मोकामा नहीं गए तो जीवन अधूरा रह जाएगा। जो एनडीए का विरोधी है और राजनीति के अपराधीकरण का भी विरोधी वह भी ‘छोटे सरकार’ यानी अनंत सिंह का चुनाव कवर करने मोकामा जा रहा है। उसे वहां से माहौल बनाना है कि एनडीए की ओर से देखिए कितना बड़ा बाहुबली चुनाव लड़ रहा है। हालांकि किसी की हिम्मत नहीं हो रही है कि बाहुबली की जगह गुंडा या अपराधी लिखे या बोले। जो एनडीए समर्थक हैं वे तो जा ही रहे हैं और मोकामा से बता रहे हैं कि सीवान में राजद ने ओसामा शहाब को उम्मीदवार बनाया है।
पटना से लेकर राजधानी दिल्ली और नोएडा के टेलीविजन स्टूडियो में अनंत सिंह पर बहस हो रही है। एनडीए विरोधी पार्टियों के नेता और उनके इकोसिस्टम के पत्रकार अनंत सिंह के बहाने एनडीए को घेर रहे हैं तो दूसरी ओर एनडीए के लोग पूछ रहे हैं कि क्या अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह संत हैं! जो चुनाव पत्रकारों के सामने अनंत सिंह की हल्की फुल्की मसखरी या ह्यूमर से शुरू हुआ था वह अब गंभीर हो गया है। एक हत्या हो गई है और हवा में बहुत कुछ होने की आशंका मंडरा रही है। दुलारचंद यादव की हत्या ने मोकामा में चुनाव लड़ रहे जन सुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी को चर्चा में ला दिया है। दुलारचंद की हत्या से पहले पीयूष लड़ाई से बाहर थे लेकिन अब उनको लेकर भी समीकरण बनाए और बिगाड़े जा रहे हैं। वे धानुक जाति से आते हैं, जिसकी अच्छी खासी आबादी मोकामा में है। कहा जा रहा है कि चूंकि एक यादव की हत्या का आरोप जदयू के भूमिहार उम्मीदवार अनंत सिंह पर लग रहा है इसलिए अगर यादव राजद की भूमिहार उम्मीदवार को वीणा देवी को छोड़ कर पीय़ूष प्रियदर्शी के साथ गए तो धानुक और यादव का गठजोड़ चुनाव जीत भी सकता है। लेकिन क्या यादव राजद उम्मीदवार को छोड़ेंगे?
बहरहाल, अनंत सिंह गिरफ्तार होकर जेल चले गए हैं। उनको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसके बाद उनका चुनाव संभालने उतरे उतरे हैं और जनता दल यू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह। सोमवार को उन्होंने पूरे मोकामा का तूफानी दौरा किया और यह मैसेज बनवाया कि पार्टी पूरी तरह से अनंत सिंह के साथ है। वैसे भी दुलारचंद यादव की हत्या के बाद भूमिहार अनंत सिंह के साथ एकजुट हुए हैं। इसका असर आसपास की सीटों पर देखने को मिल रहा है। मगध के इलाके में कई सीटों पर महागठबंधन के भूमिहार उम्मीदवाऱ हैं। यादव उनको वोट करेंगे या नहीं इस पर अटकलें लग रही हैं। देश भर से बिहार चुनाव कवर करने पहुंचे पत्रकारों को मोकामा के इतिहास, भूगोल या जनसंख्या संरचना या मतदाताओं के मूड की जानकारी नहीं है। उनको पता नहीं है कि अनंत सिंह और दिवंगत बड़े भाई बिहार के पूर्व मंत्री दिलीप सिंह की लड़ाई हमेशा भूमिहार, राजपूत और यादवों से रही है। धानुक जैसी अति पिछड़ी और दूसरी पिछड़ी जातियों का समर्थन हमेशा अनंत सिंह के साथ रहा है। मोकामा टाल की खूनी लड़ाई का इतिहास चार दशक पुराना है और गैर यादव पिछड़ों और अति पिछड़ों ने कभी अनंत सिंह का साथ नहीं छोड़ा है। उनके सारे निजी सहायक, अंगरक्षक और यहां तक की उनके लिए कुछ भी कर गुजरने वाले सहयोगी भी ज्यादातर इन्हीं जातियों से आते हैं। वे अनंत सिंह से अपनी सुरक्षा महसूस करते हैं और इसी से मोकामा चुनाव का नतीजा तय होगा।
