कांग्रेस की लड़ाई का कंफ्यूजन

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बिहार में कांग्रेस पार्टी किससे लड़ रही है यह बड़ा सवाल है। एक तरफ कांग्रेस की लड़ाई भाजपा और जनता दल यू के गठबंधन यानी एनडीए से है तो दूसरी ओर कांग्रेस की लड़ाई महागठबंधन की सहयोगी पार्टियों राजद और सीपीआई से भी है। तीसरी लड़ाई कांग्रेस के अपने नेताओं के बीच है। कांग्रेस के बड़े नेता अपने अपने उम्मीदवारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। पप्पू यादव को उन उम्मीदवारों की चिंता है, जिनको उनके कहने से टिकट मिली है तो अखिलेश प्रसाद सिंह भी ज्यादा ध्यान उन उम्मीदवारों पर दे रहे हैं, जिनको उनकी सिफारिश पर टिकट मिली है या कांग्रेस अध्यक्ष रहते, जो नेता उनके ज्यादा करीब थे। हालांकि उनका प्रयास ज्यादा से ज्यादा विधायक जिताने का है क्योंकि उसमें उनका निजी और पार्टी का हित दोनों छिपा हुआ है।

कांग्रेस में पैराशूट से लैंड हुए कन्हैया कुमार को किसी हाल में अपनी पुरानी पार्टी यानी सीपीआई को निपटाना है। इसलिए उनका सारा ध्यान बेगूसराय पर है। सोचें, इस जिले में कांग्रेस दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है और दो दिन में प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी दोनों की सभा हो गई। शनिवार को प्रियंका गांधी वाड्रा ने बछवाड़ा में सभा की, जहां कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीब दास चुनाव लड़ रहे हैं। वहां पिछली बार महज तीन सौ वोट से हारे सीपीआई के अवधेश राय मैदान में हैं। सीपीआई की मजबूत सीट होने के बावजूद कांग्रेस ने वहां अपना उम्मीदवार उतारा और प्रियंका उसका प्रचार कर रही हैं। वहां कांग्रेस का प्रयास एनडीए के सुरेंद्र मेहता को हराने से ज्यादा सीपीआई के अवधेश राय को हराने पर है। बहरहाल, प्रियंका के बाद रविवार को राहुल गांधी बेगूसराय पहुंचे। बेगूसराय की सीट पर कांग्रेस की अमिता भूषण चुनाव लड़ रही हैं, जिनके पति इनकम टैक्स के बड़े अधिकारी थे। वहां राहुल और प्रियंका के साथ न राजद के नेता थे और न लेफ्ट के नेता थे। बछवाड़ा का बदला सीपीआई के राजापाकड़ में लेना है, जहां उसने कांग्रेस की मौजूदा विधायक के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारा है।


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