महागठबंधन एकजुट होकर जाएगा चुनाव में!

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गुरुवार, 23 अक्टूबर को बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के मतदान के लिए नाम वापसी की आखिरी तारीख है। शाम तीन बजे तक स्पष्ट हो जाएगा कि कितनी सीटों पर महागठबंधन की पार्टियां ‘डैमेज कंट्रोल’ कर पाती हैं और कितनी सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ होती है। यह तय होने के बाद खबर है कि महागठबंधन की सभी पार्टियों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसका इंतजार दो हफ्ते से ज्यादा समय से हो रहा है। छह अक्टूबर को चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा की तारीखों का ऐलान किया और उसके बाद से इंतजार हो रहा है कि कब महागठबंधन की पार्टियां सीट बंटवारा फाइनल करेंगी और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान करेंगी। ध्यान रहे साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस एनडीए की भी नहीं हुई है। लेकिन एनडीए के सभी घटक दलों ने सीटों की संख्या तय करने के बाद इसके फॉर्मूले को अपने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए पोस्ट कर दिया था और अंत में उसी फॉर्मूले पर टिकटें बंटीं। इसलिए बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस किए ही एनडीए की पार्टियों का साझा ऐलान हो गया।

दूसरी ओर महागठबंधन में न साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और न सहमति के साथ सीटों की संख्या का ऐलान हुआ। सबने अपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की और इसका नतीजा यह हुआ है कि करीब एक दर्जन उम्मीदवार ज्यादा हो गए। कई सीटों पर राजद और कांग्रेस आमने सामने आ गए तो कई सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट या राजद और वीआईपी के उम्मीदवारों ने नामांकन किया। पिछले कुछ दिनों से नाम वापसी कराए जा रहे हैं। लालगंज में कांग्रेस ने उम्मीदवार हटाया तो मटिहानी में सीपीएम ने उम्मीदवार का नामांकन वापस कराया। कुछ और नामांकन गुरुवार की शाम तक वापस हो जाएंगे। उसके बाद महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस और राजद के साथ साथ दूसरी सहयोगी पार्टियों के साथ गतिरोध खत्म कराने में प्रदेश के नेताओं के साथ साथ वरिष्ठ पर्यवेक्षक और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अहम भूमिका निभाई। जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के साथ न तो राजद नेताओं के संबंध अच्छे हैं और न कांग्रेस के प्रदेश नेताओं के साथ उनका तालमेल बेहतर है। इसका कारण यह है कि उन्होंने आते ही बिहार प्रदेश कांग्रेस के जनाधार वाले नेताओं को किनारे करना शुरू किया। इसके अलावा पटना पहुंचे तो परंपरा के मुताबिक राजद प्रमुख लालू प्रसाद के यहां नहीं गए। जब लालू प्रसाद बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए तब एक सामाजिक दबाव में अल्लावरू उनसे मिलने गए। उन्होंने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के प्रति ‘डैम केयर’ का एटीच्यूड अपनाया। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की मंजूरी से उन्होंने ऐसा किया। यह भी कहा गया कि वे कांग्रेस के पुनरूत्थान के लिए ये काम कर रहे हैं। चूंकि उनके ऊपर राहुल का वरदहस्त था तो लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को मैसेज हो गया कि जो कहना है वह कृष्णा अल्लावरू से कहना है। राहुल के साथ संवाद बंद हो गया। इसके बाद बिहार में सारी चीजें बिखर गईं। अब अशोक गहलोत और भूपेश बघेल ने फिर राजद से तार जोड़े हैं और कहा जा रहा है कि गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी घोषित किया जा सकता है। उसके बाद सभी पार्टियां एकजुट होकर चुनाव में जाएंगी।


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