भारतीय जनता पार्टी के लिए यह कोई नई बात नहीं है कि वह चुनाव प्रचार में कारपेट बॉम्बिंग करती है। उसके इतने नेता चुनाव प्रचार में उतरते हैं कि विपक्षी पार्टियां देखते रह जाती हैं। बिहार चुनाव में भी भाजपा ने यह खेल शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम तो हो ही रहे हैं साथ ही प्रभारी और चुनाव प्रभारी व सह प्रभारी भी लगे हैं। लेकिन उनके अलावा देश भर के सांसदों, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की ड्यूटी भी बिहार में लग गई है। मुख्यमंत्रियों के लिए तो प्रोटोकॉल है लेकिन बाकी दूसरे राज्यों के मंत्री, सांसद और विधायक बिहार का नक्शा लेकर वह जगह खोज रहे हैं, जहां उनको जाना है। जो भी प्रचार में जाएगा या चुनाव प्रबंधन के लिए जाएगा उसे वॉर रूम के संपर्क में रहना होगा और संगठन के नेताओं आदि को तो अपना लाइव लोकेशन शेयर करना होगा। बहरहाल, शुरुआत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की है।
उन्होंने लखीसराय में बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा का नामांकन कराया और एक सभा को संबोधित किया। उसके अगले दिन गुरुवार को उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नामांकन किया तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ साथ प्रदेश के एनडीए के सभी घटक दलों के नेता शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम आलोक रंजन का नामांकन कराने का है। वे शाहाबाद के इलाके में जाएंगे, जहां लोकसभा चुनाव से राजपूत और कुशवाहा का समीकरण बिगड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले से बिहार में प्रचार कर रहे हैं। राज्य में हर बड़े नेता के नामांकन में मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, पार्टी के सांसद और सहयोगी दलों के नेता शामिल होंगे।
