नीतीश की नाराजगी का बड़ा मैसेज

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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए के पांचों घटक दलों के नेताओं ने दिल्ली में बैठ कर सीट बंटवारा कर लिया था। सभी नेताओं के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी सूचना  साझा कर दी गई थी। इसके मुताबिक भाजपा और जनता दल यू को बराबर 101-101 सीट पर लड़ना था, जबकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को 29 सीटें मिली थीं। जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह-छह सीटें दी गई थीं। इस बंटवारे को लेकर नीतीश, मांझी और कुशवाहा की पार्टी में थोड़ी नाराजगी थी। लेकिन जैसे ही चिराग पासवान की पार्टी को मिली सीटों की एक कथित सूची सामने आई वैसे ही मामला बिगड़ गया। इसमें नीतीश कुमार की पार्टी की कई जीती हुई सीटें भी शामिल थीं। कई सीटें ऐसी थीं, जो पारपंरिक रूप से भाजपा की सीट मानी जाती है और जिन्हें भाजपा नहीं छोड़ सकती है। बाद में पता भी चला कि उसमें से पांच सीटों पर भाजपा ने उम्मीदवार उतारे।

लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पता नहीं था कि यह सूची फर्जी है या किसी ने प्लांट किया हुआ है। तभी उनके सामने जैसे ही यह सूची आई वे आगबबूला हो गए। लेकिन असली दिलचस्पी वाली खबर यह है कि मुख्यमंत्री आवास में किसने सूची दिखाई, किसने नीतीश कुमार के कान में क्या क्या और कौन आकर रोने लगा। जानकार सूत्रों का कहना है कि राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और संजय झा की जोड़ी के खिलाफ सीएम आवास में नीतीश  के करीबी कई लोगों में नाराजगी थी। पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा और बरसों से जदयू कार्यालय संभाल रहे संजय गांधी को चुनाव लड़ने के लिए सीट नहीं मिली है इससे ये दोनों दुखी हैं। इसी बीच सोनबरसा के विधायक और नीतीश सरकार के मंत्री और दलित नेता रत्नेश सदा रोते गाते पटना पहुंचे कि उनकी सीट लोजपा को दे दी गई। इससे मनीष वर्मा और संजय गांधी को मौका मिला। दोनों ने रत्नेश सदा को ले जाकर नीतीश के सामने खड़ा कर दिया।

उनको रोते देख कर नीतीश कुमार भड़के और उन्होंने कहा कि इनकी सीट कैसे दूसरे को दे दी गई? इसके बाद राजगीर के दलित विधायक कौशल किशोर भी नीतीश के यहां पहुंचे। उनकी भी मुलाकात कराई गई। उनकी सीट चिराग को दिए जाने पर नीतीश ज्यादा भड़के। गौरतलब है कि नीतीश पर अक्सर यह आरोप लगता रहता है कि वे विकास के कार्यों में सबसे ज्यादा राजगीर को तरजीह देते हैं। वहीं उन्होंने ग्लास ब्रिज बनवाए, जंगल सफारी शुरू कराई, स्टेडियम बनाए और वहां की सीट किसी दूसरी पार्टी को दे दी गई। इससे नाराज नीतीश ने रत्नेश सदा और कौशल किशोर दोनों के सिंबल देकर चुनाव लड़ने भेज दिया। इसके बाद उन्होंने एकमा में धूमल सिंह को सिंबल दिया। वे चैनपुर में जमा खान की सीट चिराग को दिए जाने पर भी नाराज हुए। कुल मिला कर नीतीश ने अपना नाराजगी से एक तो चिराग पासवान का और उनके साथ साथ भाजपा का खेल पंक्चर किया और साथ ही यह मैसेज भी बनवा दिया कि उनके बीमार होने की बातें अफवाह हैं। उन्होंने एक झटके में यह दिखा दिया कि वे बॉस हैं और पूरी तरह से फिट हैं। हालांकि पूरी तरह से फिट हैं नहीं फिर भी चुनाव से पहले यह मैसेज जाना कि नीतीश अपनी जीती हुई सीटों की चिंता कर रहे हैं और अपनी पार्टी के पुराने नेताओं का ध्यान रख रहे हैं, बड़ी बात है।


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