नए मतदाताओं के लिए नया नियम

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बिना किसी पूर्व सूचना या सलाह मशविरा किए नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। चुनाव आयोग ने फॉर्म छह के जरिए मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने वालों के लिए अपने माता पिता के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की जानकारी देना आनिवार्य कर दिया है। आयोग ने अभी ऑनलाइन पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में यह प्रावधान लागू किया है।

गौरतलब है कि एसआईआऱ की प्रक्रिया के तहत चुनाव आय़ोग अभी पांच करोड़ से ज्यादा नाम काट चुका है। बहरहाल, नए प्रावधान के मुताबिक यदि ऑनलाइन आवेदन के दौरान माता पिता के एसआईआर की जानकारी नहीं दी जाती है तो आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। आयोग के मुताबिक, यदि माता पिता पिछली एसआईआर प्रक्रिया में शामिल रहे हैं तो आवेदक को उनके विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ और मतदाता सूची में दर्ज क्रमांक की जानकारी देनी होगी।

इसी तरह अगर माता, पिता एसआईआर में शामिल नहीं थे तो इसका विकल्प चुनते हुए उनके नाम और यदि उपलब्ध हों, तो ईपीआईसी नंबर दर्ज करने होंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग का कहना है कि इससे नए मतदाताओं की पहचान सत्यापित करने में आसानी होगी और कई मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत भी कम पड़ेगी।

इस बदलाव की खबर मीडिया में आने के बाद आयोग ने यह भी दोहराया कि एसआईआर का मकसद पात्र मतदाताओं को शामिल करना और मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित या विदेशी मतदाताओं के नाम हटाना है। हालांकि, इस नए बदलाव को लेकर सवाल भी उठे हैं। कई जानकारों का कहना है कि फॉर्म छह, जन प्रतिनिधित्व कानून और मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत निर्धारित प्रारूप का हिस्सा है। ऐसे में इसमें बदलाव के लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना और राजपत्र में संशोधन जरूरी होता है। अब तक ऐसा कोई संशोधन सार्वजनिक रूप से जारी नहीं हुआ है।

इसी बीच संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों ने भी एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई है। तीन विशेष दूतों ने भारत में एसआईआर की प्रक्रिया देखने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे जाने को लेकर चिंता जताई। हालांकि चुनाव आयोग ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए पूरी प्रक्रिया को संवैधानिक और पारदर्शी बताया है।


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