होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत का कच्चा तेल आयात मजबूत

Categorized as समाचार

भारत के कच्चे तेल आयात पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव का असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, यदि क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तथा जहाजरानी लागत बढ़ सकती है। केप्लर के एक विश्लेषक ने यह बात कही।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संघर्षविराम संबंधी टिप्पणियों के बाद क्षेत्र में हुई ताजा झड़पों ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि भारत की कच्चे तेल आपूर्ति पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय तेल शोधन कंपनियों ने आयात स्रोतों में विविधता लाई है।

उन्होंने कहा, “हालिया तनाव बढ़ने से पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये कच्चे तेल का प्रवाह पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ था। हालांकि, भारत के लिए पिछले 100 दिन में स्थिति काफी हद तक सामान्य रही है और तेल शोधन कंपनियों ने विविध आयात स्रोतों के जरिये आपूर्ति का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।”

Also Read : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन एवं डिजिटल नवाचार के माध्यम से झारखंड को देश का अग्रणी एआई राज्य बनाने की दिशा में सरकार का रोडमैप

रितोलिया ने कहा कि भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी काफी अधिक बनी हुई है। वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होने वाली आपूर्ति से ऊर्जा सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलती है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से मिलने वाले कच्चे तेल ने भी आयात स्रोतों में विविधता लाने में मदद की है।

उन्होंने कहा कि जून में भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति बाधित होने की आशंका से तेल शोधन कंपनियों ने अधिक खरीदारी की, जिससे आयात में वृद्धि हुई।

रूस से भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक है। इससे रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि संभावित आपूर्ति बाधाओं के बावजूद ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय तेल शोधन कंपनियों के लिए निकट भविष्य में बड़ा स्रोत बनने की संभावना नहीं है। अमेरिकी प्रतिबंध नीति को लेकर अनिश्चितता, अनुपालन जोखिम और व्यावसायिक कारण इसके पीछे प्रमुख वजह हैं।

रितोलिया ने कहा कि बाजार को अब एलपीजी (रसोई गैस) और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आपूर्ति पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इनके लिए निकट भविष्य में वैकल्पिक स्रोत कम हैं और खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति तथा जहाजरानी में बाधाओं का इन पर अधिक असर पड़ सकता है।

Pic Credit : ANI


Previous News Next News

More News

प्रहलाद जोशी के जरिए बड़ा संदेश

July 29, 2026

ऐसी चर्चा थी कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देंगे तो डॉक्टर जितेंद्र सिंह को उनकी जगह शिक्षा का प्रभार दिया जाएगा। यह अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान वे सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। प्रधानमंत्री आवास के सामने राहुल गांधी के…

अब ई-20 पार्टी बन कर तैयार है

July 29, 2026

सरकार अभी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से मिले जख्मों को सहला ही रही है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 पेट्रोल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए ई-20 पार्टी का गठन हो गया है। इस पार्टी को सोशल मीडिया में पर्याप्त समर्थन भी मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी…

क्या दिपके राजनीतिक पार्टी बनाएंगे?

July 29, 2026

अभिजीत दिपके और उनके नजदीकी लोग जैसे आशुतोष रांका और सौरव दास दावा कर रहे हैं कि अभी राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है और न चुनाव लड़ना है। लेकिन असल में दिपके और उनकी टीम राजनीतिक दल बनाएंगे। ध्यान रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग खास कर…

पीके से पूरा एनडीए लड़ रहा है

July 29, 2026

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए दुःस्वप्न साबित हो रहा है। भाजपा के कई नेता कह रहे हैं कि नितिन नबीन को सीट से इस्तीफा नहीं देना चाहिए थे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बाद वे राज्यसभा चले गए और उन्होंने बांकीपुर सीट से इस्तीफा दे दिया। इसकी वजह…

कॉकरोच: एक शब्द का बल

July 29, 2026

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने दिया था। उन के शब्दों ने हिटलर के सामने पस्त हो रहे इंग्लैंड को बल दिया। इस हद तक कि कई यूरोपीय देशों को टिके रह कर लड़ने का हौसला मिला।…. चर्चिल ने अंग्रेजी भाषा को बुलाया और उसे युद्धभूमि में उतार दिया।” आज कम…

logo