पीएम मोदी का ‘मैजिक’, 22 राज्यों में सरकार और पूरे देश में 2013 के मुकाबले 3 गुना से ज्यादा पार्टी के विधायक

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13 सितंबर 2013 को हुई भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम घोषित किया गया। तब भाजपा या एनडीए की देश के कुछ गिने-चुने राज्यों में ही सरकार थी। देश के कई राज्य तो ऐसे थे, जहां भाजपा की जमीनी पकड़ भी शून्य थी। लेकिन, आज देश के 31 में से 22 राज्यों में भाजपा या एनडीए गठबंधन की सरकार है। यानी 22 राज्यों में सत्ता के शिखर पर भाजपा या एनडीए के नेता सीएम के तौर पर काबिज हैं। भाजपा को यह उपलब्धि 2014 के बाद हासिल हुई है और इसमें सबसे बड़ा योगदान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। 

भाजपा ने देश के कई ऐसे राज्यों में पीएम मोदी के नेतृत्व में राजनीतिक जमीन मजबूत की, जिसके बारे में वह कभी सोचती भी नहीं थी। हिंदी पट्टी के राज्यों के अलावा ओडिशा और अब पश्चिम बंगाल ये दो ऐसे राज्य रहे जहां की सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा को खूब मेहनत करनी पड़ी। ओडिशा में तो भाजपा ने सत्ता हासिल की है। अब भाजपा ने ममता बनर्जी को बंगाल की सत्ता से विदाई दे दी है। यह एक ऐसा राज्य है जहां भाजपा को अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में कई कार्यकर्ताओं के जीवन की आहुति का दर्द बर्दाश्त करना पड़ा। 

अभी भारत का पूरा का पूरा नक्शा भगवा नजर आने लगा है। सुदूर दक्षिण से उत्तर तक और पूरब से पश्चिम तक हर तरफ भाजपा का परचम लहरा रहा है। 

भाजपा और एनडीए की उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, गोवा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मणिपुर, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, नागालैंड और पुडुचेरी में सरकार है। इसमें नया नाम पश्चिम बंगाल का भी जुड़ गया है। 

पीएम मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने से पहले के आंकड़े पर नजर डालें तो सितंबर 2013 तक भारत के राज्यों में अगर भाजपा के विधायकों के आंकड़े को देख लें तो यह 773 थी। जबकि 4 मई 2026 जबकि पांच राज्यों में मतगणना चल रही है उसको मिलाकर देखें तो यह 1,798 की संख्या को पार कर गई है। बता दें कि इन 5 राज्यों के चुनाव के आंकड़े अभी पूरी तरह से घोषित नहीं हुए हैं। ऐसे में इन आंकड़ों में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है। लेकिन, कहने का मतलब यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल केंद्र की सत्ता का रास्ता ही भाजपा के लिए तैयार नहीं किया बल्कि कई राज्यों में भाजपा की सरकार स्थापित करा दी। 

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आंध्र प्रदेश में जहां 2013 में भाजपा के पास दो विधानसभा सीटें थी वहीं 2026 में सीटों की संख्या 8 हो गई। इसी तरह अरुणाचल में 3 से बढ़कर 46, बिहार में 91 से 89, छत्तीसगढ़ में 50 से 54, दिल्ली में 23 से 48, गोवा में 21 से 27, गुजरात में 115 से 161, हरियाणा में 4 से 48, हिमाचल प्रदेश में 26 से 25, जम्मू-कश्मीर में 11 से 29, झारखंड में 18 से 21, कर्नाटक में 40 से 64, मध्य प्रदेश में 143 से 165, महाराष्ट्र में 46 से 131, मणिपुर में 0 से 36, मेघालय में 0 से 2, मिजोरम में 0 से 2, नागालैंड में 1 से 11, ओडिशा में 6 से 79, पंजाब में 12 से 2, राजस्थान में 78 से 118, सिक्किम में अभी खाता नहीं खुला है। तेलंगाना में 7 का फायदा, त्रिपुरा में 0 से 32, उत्तर प्रदेश में 47 से 257, उत्तराखंड में 31 से 47 सीटों तक की बढ़त हासिल की है। 

इसके साथ ही केरल में 0 से 3, असम में 5 से बढ़कर 82, पुडुचेरी में 0 से 3, तमिलनाडु में 0 से 2 और पश्चिम बंगाल में 0 से 199 तक साल 2013 के बाद से अब तक पहुंचा दिया है। इन पांच राज्यों में अभी मतगणना के नतीजे पूर्णत: घोषित नहीं हुए हैं। ऐसे में अभी नंबरों में और बदलाव की संभावना है। 

इन आंकड़ों से स्पष्ट हो गया है कि पीएम मोदी ने केंद्र की सरकार में रहते हुए भाजपा के लिए राज्यों में राजनीति के लिए भी रास्ता बनाया और धीरे-धीरे पार्टी ने सभी राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के काम में तेजी लाई और इसका परिणाम हर राज्य के चुनाव नतीजों में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है। यही वजह है कि केंद्र के साथ 31 में से 22 राज्यों में सत्ता के शिखर पर या तो एनडीए है या अकेली भाजपा। इसके साथ ही भाजपा ने अब तक देश के 72 प्रतिशत क्षेत्रफल पर और 78 प्रतिशत आबादी पर अपना शासन जमा लिया है।

Pic Credit : ANI


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