नई दिल्ली। संसद में सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के लिए जो विधेयक ला रही है उन्हें पास कराना आसान नहीं होगा। ये संविधान में संशोधन के लिए विधेयक हैं, जिन्हें पास कराने के लिए विशेष बहुमत की जरुरत होगी। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत, संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। इसके लिए सरकार को कुछ विपक्षी पार्टियों और ऐसी पार्टियों से बात करनी होगी, जो मौजूदा लोकसभा में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।
विशेष बहुमत का मतलब है कि उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत चाहिए। 543 सदस्यों वाली लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं। यानी अभी कुल संख्या 540 यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों को इसके पक्ष में वोट देना होगा। फिलहाल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 292 सांसद हैं। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं।
