सबरीमाला मंदिर ने महिलाओं की एंट्री का विरोध किया

Categorized as समाचार

नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मंदिर प्रशासन ने विरोध किया है। सर्वोच्च अदालत की नौ जजों की संविधान बेंच इस मामले में पहले दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को चौथे दिन इस मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड यानी टीडीबी ने कहा कि यह खिलौने की दुकान या रेस्टोरेंट का मामला नहीं है। यह आजन्म ब्रह्मचारी माने जाने वाले देवता का मंदिर है।

मंदिर प्रबंधन का पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिंघवी ने कहा, ‘10 से 50 साल के उम्र की महिलाएं देवता के स्वरूप और पहचान के विपरीत हैं। भारत में अयप्पा के करीब एक हजार मंदिर हैं। अगर महिलाओं को दर्शन करना है, तो वहां जाएं। उन्हें इसी खास मंदिर में क्यों आना है’। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। साथ ही यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर पाबंदी लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए पाबंदी हटा दी। इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट में दायर 50 से अधिक याचिकाओं के आधार पर सात महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों पर बहस हो रही है। सबसे पहले केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत ठहराया। सरकार ने कहा कि मंदिर की परंपरा के मुताबिक महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।

बहरहाल, बुधवार को अभिषेक सिंघवी ने कहा कि धार्मिक मामलों में जनहित याचिका से बचना चाहिए। इससे बाहरी लोग परंपराओं में दखल देने लगते हैं। कोर्ट ने भी यह सवाल पूछा कि क्या कोई भी व्यक्ति आस्था से जुड़े नियमों को चुनौती दे सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सामाजिक सुधार जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर धर्म को कमजोर नहीं किया जा सकता। जजों ने स्पष्ट किया कि सुधार और धार्मिक मान्यता के बीच संतुलन जरूरी है।


Previous News Next News

More News

कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला

July 30, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला जारी है। अलग अलग कारणों से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। कुछ और मंत्रियों का इस्तीफा होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थोड़ी अलग परिस्थितियों में हुआ है। इसकी तुलना यूपीए दो की सरकार में खेल मंत्री रहे…

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

logo