नीतीश सीएम पद छोड़ेंगे

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पटना। दो दशक के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके साथ मौजूद रहे। इससे पहले नीतीश कुमार ने एक लंबी पोस्ट लिख कर सोशल मीडिया में साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा संसद के उच्च सदन में जाने की थी, इसलिए वे नामांकन भर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा समर्थन रहेगा।

माना जा रहा है कि नीतीश की जगह भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। मौजूदा फॉर्मूले के हिसाब से भाजपा का मुख्यमंत्री और जनता दल यू की ओर से दो उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। नई सरकार के गठन से पहले जनता दल यू की ओर से गृह मंत्रालय की मांग रख दी गई है। गौरतलब है कि अभी भाजपा के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह मंत्रालय है। इस बीच यह भी खबर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार आठ मार्च को जनता दल यू में शामिल होंगे और उसके बाद उनकी आगे की भूमिका तय होगी। माना जा रहा है कि वे उप मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

बहरहाल, गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नतिन नबीन और एनडीए के अन्य प्रत्याशियों रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार ने भी नामांकन दाखिल किया। राष्ट्रीय जनता दल की ओर से निवर्तमान सांसद अमरेंद्रधारी सिंह ने भी परचा दाखिल किया है। इसलिए चुनाव निर्विरोध नहीं हो पाया। अब 16 मार्च को मतदान के बाद ही विजेताओं के नाम की घोषणा होगी।

राज्यसभा के लिए नीतीश कुमार के नामांकन को लेकर कई दिनों से सस्पेंस बना हुआ था। गुरुवार को जब उनके नामांकन करने और अमित शाह के मौजूद रहने की खबरें आने लगीं तो सुबह से जनता दल यू के नेता और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमा होने लगे। उन्होंने इसका विरोध किया और नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की वजह से निशांत कुमार की पार्टी में ज्वाइनिंग टाल दी गई। वे गुरुवार को ही पार्टी ज्वाइन करने वाले थे। लेकिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में भी तोड़ फोड़ कर दी।

नीतीश कुमार के नामांकन के बाद के बाद अमित शाह ने कहा, ‘उनका ये कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा। बिहार के विकास के सारे मायने को उन्होंने गति देने का काम किया। उन्होंने अपने शासनकाल में बिहार को जंगलराज से मुक्त करने का काम किया’। शाह ने कहा, ‘उन्होंने न केवल बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा, उसकी स्थिति में भी सुधार किया। इतने लंबे कार्यकाल में विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनके कुर्ते पर कभी दाग नहीं लगा। भ्रष्टाचार का आरोप लगे बिना इतना लंबा राजनीतिक सफर शायद ही किसी ने तय किया हो, जो नीतीश कुमार ने तय किया है’।


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