नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के साझा हमले के तीसरे दिन ईरान ने चार देशों के छह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। उसने सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको पर भी हमला किया और कतर के तेल संयंत्र को भी निशाना बनाया। इस बीच कुवैत में अमेरिका के तीन विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए। अमेरिका ने कहा कि दोस्ताना कार्रवाई में उसके लड़ाकू विमान क्रैश हो गए। हालांकि इसमें किसी की जान नहीं गई। पायलट पहले ही बाहर निकल गए थे। अमेरिकी सेना ने कहा है कि कुवैत ने गलती से अमेरिका के तीन एफ 15ई लड़ाकू विमानों को गिरा दिया है।
जंग के तीसरे दिन ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी की जान नहीं गई है। इसके जवाब में ब्रिटिश सेना कार्रवाई कर रही है। इससे पहले, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका को इस बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
उधर कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ईरान के दो ड्रोन देश के ऊर्जा ठिकानों पर गिरे हैं। जंग के तीसरे दिन ओमान की खाड़ी में सोमवार को एक तेल टैंकर पर बम से लैस ड्रोन बोट से हमला किया गया, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। दूसरी ओर ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि ईरान ने अमेरिका से फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की है।
बहरहाल, जंग के तीन दिन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने मिल कर अब तक ईरान के एक हजार से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान शुरुआती 30 घंटे में दो हजार से ज्यादा बम गिराए गए। इनमें अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सात सौ से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 28 फरवरी को शुरू हुई इस लड़ाई के पहले दिन हुई बमबारी में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इसके अलावा रविवार को तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इस बीच ईरान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि उसने अमेरिका को उसके खिलाफ हालिया सैन्य हमलों के लिए अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दिया।
सोमवार को संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी, आईएईए में ईरान के राजदूत ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों में ईरान की नतांज के परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय निगरानी वाला संयंत्र है। हालांकि आईएईए की ओर से कहा गया है कि कहना है कि उनकी एजेंसी के पास इस बात का कोई संकेत नहीं है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में स्थित किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचा है या उस पर हमला हुआ है।
