अमेरिका में ट्रंप टैरिफ रद्द

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नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च अदालत ने दुनिया भर के देशों पर लगाए गए ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने इसे अवैध बताया है और कहा है कि राष्ट्रपति को इस तरह से दुनिया के देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने करीब 50 साल पुराने आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत ये टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत और अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते पर क्या असर होगा, यह देखने वाली बात होगी।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध बताया है। साथ ही कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। ध्यान रहे राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का यह पहला नीतिगत फैसला था, जो सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अमेरिका के व्यापारी यह मुकदमा लड़ रहे थे क्योंकि ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने से उनके कारोबार पर भी असर हो रहा था। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी जैसे को तैसा टैरिफ लगा दिए थे।

ट्रंप का दावा है कि उनके लगाए टैरिफ से अमेरिका को छह सौ अरब डॉलर से ज्यादा अतिरिक्त राजस्व मिला है। ट्रंप के मुताबिक, यह पैसा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और देश को विदेशी निर्भरता से बचाता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखना सही है। यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था तब ट्रंप ने कहा था कि अगर वे मुकदमा हारे तो देश बरबाद हो जाएगा। ध्यान रहे इस फैसले के बाद सारे देशों पर लगाए टैरिफ अपने आप हट जाएंगे। अमेरिका को कंपनियों के पैसे वापस भी करने पड़ सकते हैं।

असल में अमेरिका में एक इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट है, जिसे 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद देश के सामने गंभीर खतरा की स्थिति में  या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां देना था। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रंप ने इसी कानून का सहारा लेकर टैरिफ लगाए थे।


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