बांग्लादेश में तारिक बनेंगे पीएम

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नई दिल्ली। बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी ने बड़ी जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय हो गया है। 17 साल के निर्वासन के बाद 25 जनवरी 2026 को ढाका लौटे तारिक रहमान महज 20 दिन के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंच गए हैं। बांग्लादेश को 35 साल के बाद पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। इसे खालिदा जिया और शेख हसीना दौर की अंत माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले ही महीने खालिदा जिया का निधन हुआ, जबकि शेख हसीना तख्तापलट के बाद भारत में रह रही हैं।

बहरहाल, बांग्लादेश की तीन सौ सदस्यों की संसद की 299 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिनमें से बीएनपी ने 213 सीटें जीत कर विशाल बहुमत हासिल किया है। जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के 77 सीटें मिली हैं। तारिक रहमान दो सीटों से चुनाव लड़े थे और दोनों जगह से जीते हैं। दूसरी ओऱ जमात के नेता शफीकुर रहमान भी अपनी सीट से चुनाव जीत गए हैं। शेख हसीना का तख्ता पलट करने के लिए हुए आंदोलन से निकली सिटिजन पार्टी को सिर्फ छह सीटें मिली हैं। यह पार्टी जमात ए इस्लामी के साथ मिल कर चुनाव लड़ी थी।

चुनाव नतीजों के बाद देश में करीब 20 साल बाद बीएनपी की सरकार बनेगी। 2008 से 2024 तक यानी लगातार 16 साल तक शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी। 2024 में तख्तापलट के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। आखिरी बार 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक शेख हसीना और खालिदा जिया ही प्रधानमंत्री बनते रहे।

संसदीय चुनावों के साथ साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी हुआ था। इसमें 68.06 फीसदी लोगों ने चार्टर का समर्थन किया है। इसमें प्रधानमंत्री पद दो कार्यकाल के लिए निर्धारित करने के साथ साथ कई सुधारों का वादा किया गया है। इसमें संसद में एक उच्च सदन की स्थापना, महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने जैसे कई सुधारवादी कदम उठाने की बात है।

बहरहाल, तारिक रहमान की पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो वह अल्पसंख्यकों की संपत्ति और उनके जीवन की सुरक्षा के लिए कानून बनाएगी। माना जा रहा है कि इस वादे की वजह से और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव मैदान में नहीं होने की वजह से एक करोड़ हिंदू मतदाताओं का समर्थन बीएनपी को मिला। अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज बीएनपी को बड़ी जीत मिली है। गौरतलब है कि बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। उसके नहीं होने से उसके समर्थकों ने भी बीएनपी को वोट किया। जमात और सिटिजन पार्टी को रोकने के लिए लोगों ने वोट डाला। चुनाव नतीजों के बाद बीएनपी नेताओं ने शेख हसीना को वापस लाने और उन पर मुकदमा चलाने की मांग की है लेकिन साथ ही भारत के साथ संबंध सुधार का वादा भी किया है।


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