अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे मानहानि का केस

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प्रयागराज। तीन दिन बीत जाने के बाद भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन के बीच शुरू हुआ विवाद समाप्त नहीं हो रहा है। उलटे अब अविमुक्तेश्वरानंद ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने उनको दिया नोटिस वापस नहीं लिया तो वे मानहानि का मुकदमा करेंगे। प्रयागराज प्रशासन के नोटिस के जवाब में उन्होंने आठ पन्नों का जवाब ईमेल के जरिए भेजा है। इस बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया है और उनको गंगा स्नान से रोके जाने को गौ हत्या जैसा पाप बताया है।

गौरतलब है कि रविवार को मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी से संगम तट तक जाने से रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने उनके शिष्यों से मारपीट भी की थी। उस दिन से वे अनशन पर बैठे हैं। इस बीच प्रशासन ने उनको यह नोटिस दे दिया कि वे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य नहीं हैं तो अपने नाम के साथ शंकराचार्य क्यों जोड़ते हैं। इसका जवाब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भेजा है।

अपने जवाब में उन्होंने प्रशासन के नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया। अविमुक्तेश्वरानंद ने लिखा है, ‘सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे मुझे शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका गया हो। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने या रोक लगाने का अधिकार नहीं है’। उन्होंने इससे पहले कहा था कि जिसको शंकराचार्य लोग मानते हैं वही शंकराचार्य होता है। उन्होंने कहा कि दो शृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य उनको ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य मानते हैं, जबकि पुरी के शंकराचार्य की इस पर कोई राय नहीं है।

इस बीच द्वारका की शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोके जाने की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए। ब्राह्मणों को पुलिस ने चोटी पकड़कर घसीटा। यह शासन का अहंकार है। सत्ता हर दिन नहीं रहेगी। गंगा स्नान से रोकने वालों को गौ हत्या का पाप लगता है। गौरतलब है कि सदानंद महाराज और अविमुक्तेश्वरानंद दोनों स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं। उनके निधन के बाद दोनों एक साथ शंकराचार्य बने थे।


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