नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत का रास्ता साफ नहीं हो रहा है। ईरान ने अमेरिका से सीधी बातचीत करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले माना जा रहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेन कुशनर की वार्ता ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ होगी। अराघची शुक्रवार की रात को पाकिस्तान पहुंच गए थे। लेकिन बाद में ईरान ने कहा कि वह सीधी वार्ता नहीं करेगा।
ईरान की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि ईरान अपनी बात पाकिस्तान के जरिए ही अमेरिका तक पहुंचाएगा। इस बीच शनिवार को विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। ईरानी विदेश मंत्री की मुलाकात पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से भी हुई है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक अराघची ने पाकिस्तान को ईरान की शर्तें और अमेरिकी मांगों पर अपनी आपत्तियों की जानकारी दी है। इस मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी मौजूद थे। इस बैठक में अऱाघची और शरीफ ने क्षेत्रीय हालात, युद्धविराम और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की। इससे पहले भी पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ वे कई दौर की बातचीत कर चुके हैं।
उधर अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि अमेरिका किसी समझौते के लिए बेचैन नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान की ओर से एक प्रस्ताव आया है, लेकिन वे अच्छे समझौते का इंतजार करेंगे और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे। इस बीच व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधे शांति वार्ता करेगा। इसके लिए ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद भेजा है।
गौरतलब है कि पहले दौर की वार्ता के लिए उप राष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद गए थे। लेकिन समझौता नहीं हो सका था। इसलिए इस बार उनको रोक दिया गया है। वेंस के नहीं आने की सूचना के बाद ईरान की ओर से ईरानी संसद यानी मजलिस के प्रमुख गालिबाफ को इस्लामाबाद जाने से रोक दिया गया। गौरतलब है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक चली इस वार्ता में दोनों के बीच होर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण और परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी।
