न्यूयॉर्क/वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस विधेयक का समर्थन किया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है। इस प्रस्तावित कदम से व्हाइट हाउस को चीन और भारत जैसे देशों पर मॉस्को से सस्ता तेल खरीदना बंद करने के लिए दबाव बनाने की तगड़ी गुंजाइश बनेगी।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बुधवार को कहा कि यह विधेयक चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ व्हाइट हाउस को “बेहद मजबूत दबाव बनाने का साधन” प्रदान करेगा, ताकि उन्हें रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
ग्राहम ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विभिन्न मुद्दों पर बेहद सार्थक बैठक के बाद उन्होंने उस द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं कई महीनों से सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और अन्य के साथ काम कर रहा हूं।”
उन्होंने कहा, “यह सही समय पर आया है, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है, जबकि पुतिन केवल बयानबाजी कर रहे हैं और निर्दोष लोगों की हत्या जारी है। यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा, जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं।”
ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर जबरदस्त दबाव बनाने का अधिकार देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विधेयक पर “मजबूत” द्विदलीय समर्थन मिलेगा और इसे “संभवतः अगले सप्ताह की शुरुआत में” मतदान के लिए लाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया है, जो दुनिया में सबसे अधिक शुल्क वाले देशों में शामिल है। इसमें रूस से ऊर्जा खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है।
ग्राहम और सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट, 2025’ पेश किया है, जिसके तहत उन देशों पर द्वितीयक शुल्क और प्रतिबंध लगाए जाएंगे, “जो यूक्रेन में पुतिन के क्रूर युद्ध को वित्त पोषित करना जारी रखते हैं।”
इस विधेयक में रूसी तेल की द्वितीयक खरीद और पुनर्विक्रय पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है, जिसे सीनेट की विदेश संबंध समिति के लगभग सभी सदस्यों का सह-प्रायोजन प्राप्त है।
