नई दिल्ली। देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के काम में लगे बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओज को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने बीएलओज के ऊपर से दबाव कम करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को कहा कि सरकार अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करे ताकि काम के घंटे कम किए जा सकें। साथ ही यह भी कहा कि अगर किसी के पास जरूरी कारण है तो उसकी छुट्टी भी मंजूर की जाए।
सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकारों या राज्य चुनाव आयोगों की तरफ से नियुक्त कर्मचारियों को एसआईआर की ड्यूटी निभानी होगी। लेकिन अगर किसी के पास ड्यूटी से छूट मांगने का कोई खास कारण है, तो राज्य सरकार उनकी अपील पर विचार करके उनकी जगह दूसरे कर्मचारी को नियुक्त कर सकता है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर एसआईआर के काम में लगे बीएलओ के पास काम का बोझ ज्यादा है, तो राज्यों को और स्टाफ को काम पर लगाना चाहिए।
सर्वोच्च अदालत ने कहा, ‘इससे बीएलओ के काम के घंटे कम करने में मदद मिलेगी और पहले से ही नियमित काम के अलावा एसआईआर का काम कर रहे अधिकारियों पर दबाव कम होगा’। गौरतलब है कि तमिल अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी टीवीके ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें चुनाव आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह समय पर काम पूरा नहीं करने वाले बीएलओ के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करे। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद तीन निर्देश जारी किए। पहला, राज्य अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करे ताकि काम के घंटे कम किए जा सकें। दूसरा, जहां किसी व्यक्ति के पास ड्यूटी से छूट मांगने के लिए कोई खास कारण हो, राज्य सरकार ऐसी अपील विचार करेगी और उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करेगी। और तीसरा, अगर कर्मचारियों के किसी दिक्कत का समाधान नहीं हो पाता है, तो पीड़ित व्यक्ति कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
