नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले संसद के परिसर में मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने विपक्ष से ड्रामा नहीं करने की अपील की, जिस पर विवाद छिड़ गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा मीडिया के सामने कहा था कि संसद में ड्रामा नहीं होना चाहिए, डिलीवरी होनी चाहिए। इस पर कई विपक्षी नेताओं ने नाराजगी जताई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि विपक्ष का जरूरी मुद्दे उठाना ड्रामा करना नहीं होता है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के बाहर मीडिया से करीब 10 मिनट बात की। उन्होंने कहा, ‘यह सत्र पराजय की हताशा या विजय के अहंकार का मैदान नहीं बनना चाहिए। नई पीढ़ी के सदस्यों को अनुभव का लाभ मिलना चाहिए। यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए। यहां जोर नीति पर होना चाहिए, नारों पर नहीं।’ मोदी ने आगे कहा, ‘शीतकालीन सत्र सिर्फ एक परंपरा नहीं हैं, ये राष्ट्र को प्रगति की ओर तेज गति से ले जाने के जो प्रयास चल रहे हैं, उसमें ऊर्जा भरने का काम ये शीतकालीन सत्र करेगा, ये मेरा विश्वास है’।
बिहार चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘बीते दिनों बिहार चुनाव में भी मतदान में जो तेजी आई है, वो लोकतंत्र की ताकत है। माता-बहनों की भागीदारी बढ़ना एक नई आशा और विश्वास पैदा कर रहा है’। मोदी ने आगे कहा, ‘ना हार की बौखलाहट, ना विजय का अंहकार: विपक्ष भी पराजय की निराशा से बाहर निकलकर सार्थक चर्चा करे। दुर्भाग्य से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पराजय भी नहीं पचा पाते। लेकिन मेरा सभी दलों से आग्रह है कि शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए और ये विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए’।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘चुनावी स्थिति, महोदय, और प्रदूषण जैसे मुद्दे बहुत बड़े हैं। आइए इन पर चर्चा करें। संसद किस लिए है? यह कोई तमाशा नहीं है। मुद्दों पर बात करना और उन्हें उठाना तमाशा नहीं है। असली तमाशा तो यह है कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोकतांत्रिक चर्चा ही न होने दी जाए’।
