मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकार बैन

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नई दिल्ली। अफगानिस्तान के तालिबान शासन के विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा विवादों में फंस गई है। तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने शनिवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें महिला पत्रकारों को एंट्री नहीं दी गई। भारत सरकार पल्ला झाड़ रही है कि उसका इससे कोई मतलब नहीं है लेकिन कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया है और सोशल मीडिया में इस बात के लिए भारत सरकार की आलोचना हो रही है। पूछा जा रहा है कि क्या भारत में भी तालिबानी कायदा कानून चलेगा?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों ने इसे लेकर तीखा हमला किया है।  प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा, ‘भारत में हमारे ही देश की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया, जबकि महिलाएं ही देश की रीढ़ और गौरव हैं’। विवाद बढ़ने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका कोई रोल नहीं था। न ही उनकी तरफ से पत्रकारों को बुलाया गया था। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगानी दूतावास में हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘जब अफगानिस्तानी मंत्री दिल्ली आए तो मुंबई स्थित अफगानिस्तान के काउंसिल जनरल ने ही 10 अक्टूबर को चुनिंदा पत्रकारों को आमंत्रण भेजा था। अफगान दूतावास भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है’। गौरतलब है कि तालिबानी विदेश मंत्री नौ से 16 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ दोपक्षीय वार्ता की। हालांकि इसके बाद दोनों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई।

तालिबानी मंत्री मुत्तकी ने अफगानिस्तान दूतावास में मीडिया से बात की। हालांकि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल चुनिंदा पुरुष पत्रकार और अफगान दूतावास के अधिकारी ही शामिल हुए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक भी महिला पत्रकार नहीं थी। कई महिला पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें एंट्री नहीं दी गई। खबरों के मुताबिक, मुत्तकी के साथ आए तालिबान अधिकारियों ने ही ये तय किया था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन शामिल होगा। हालांकि बाद में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल न करना किसी नीति या भेदभाव के कारण नहीं हुआ। ये अनजाने में हुआ, पास की संख्या सीमित थी।


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