भारत पर सबसे ज्यादा असर

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नई दिल्ली। एच 1बी वीजा की फीस में कई गुना बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर होगा। इसका कारण यह है कि यह वीजा सबसे ज्यादा भारतीयों को मिलता है। यह एक नॉन इमिग्रेंट वीजा है, जो लॉटरी के जरिए दिया जाता है। यह खास स्किल रखने वाले पेशेवरों को दिया जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि अब अमेरिका यह वीजा सिर्फ उन्हीं लोगों को देगा, जो बहुत टैलेंटेड होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौकरियां छीनने वालों को यह वीजा नहीं मिलेगा।

अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में एच 1बी वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिला। हालांकि इस वीजा कार्यक्रम की अमेरिका में आलोचना होती है। अमेरिकी तकनीकी कर्मचारियों का मानना है कि कंपनियां एच 1बी वीजा का इस्तेमाल वेतन घटाने और अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां छीनने के लिए करती हैं। गौरतलब है कि साल 2023 में एच 1बी वीजा धारकों में एक लाख 91 हजार भारतीय थे। यह आंकड़ा 2024 में बढ़कर दो लाख सात हजार हो गया।

भारत की आईटी और आईटी सेवा देने वाली टेक कंपनियां हर साल हजारों कर्मचारियों को एच 1बी वीजा पर अमेरिका भेजती हैं। हालांकि, अब इतनी ऊंची फीस पर लोगों को अमेरिका भेजना कंपनियों के लिए नुकसानदेह होगा। खासकर मिड लेवल और एंट्री लेवल यानी कम स्किल के काम करने वाले कर्मचारियों को वीजा मिलना मुश्किल होगा। ट्रंप के इस फैसले के बाद कंपनियों को या तो अमेरिकी लोगों को नौकरी पर रखना होगा या कंपनियां नौकरियां आउटसोर्स कर सकती हैं। दोनों ही फैसलों से अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के अवसर कम होंगे।


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