भारत समर्थक पीएम नहीं चाहिए

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काठमांडो। पूरे नेपाल को हिंसा की आग में झोंकने वाले युवा प्रदर्शनकारियों में अब आपस में विवाद शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारियों के एक गुट को अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए सुशीला कार्की कबूल नहीं है क्योंकि वे भारत समर्थक हैं। हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और करीब तीन दर्जन लोगों की मौत के बाद युवा प्रदर्शनकारी पिछले 48 घंटे से अंतरिम प्रधानमंत्री चुनने  की कोशिश कर रहे हैं। उनकी ऑनलाइन मीटिंग हो रही है और सेना से भी बातचीत चल रही है। लेकिन अंतरिम पीएम के नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।

गुरुवार को इसे लेकर युवा प्रदर्शनकारी दो गुट में बंट गए। इसके बाद सेना मुख्यालय के बाहर दोनों गुटों में हाथापाई भी हुई। इसमें कई युवक घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने अंतरिम पीएम के लिए सुशीला कार्की के नाम को खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि सुशीला कार्की भारत समर्थक हैं और उन्हें यह स्वीकार नहीं हैं। यह गुट मांग कर रहा है कि काठमांडो के मेयर बालेन शाह पीएम बनें। अगर बालेन नहीं बनते हैं तो धरान के मेयर हरका सम्पांग उनके पीएम उम्मीदवार होंगे। गौरतलब है कि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और पिछले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भी भारत विरोधी थे।

बहरहाल, अंतरिम पीएम के नाम को लेकर सेना मुख्यालय में दो दिन से प्रदर्शनकारी गुटों के साथ बातचीत चल रही है। उनके बीच इस बात पर असहमति है कि बातचीत कहां होनी चाहिए। एक गुट सेना मुख्यालय की जगह राष्ट्रपति भवन में करने की मांग कर रहा है। इस बीच नेपाल में तख्तापलट के दो दिन बाद गुरुवार को युवा प्रदर्शनकारियों के नेता सामने आए। सामने आए दो नेताओं ने कहा कि युवाओं ने यह विरोध, प्रदर्शन बुजुर्ग नेताओं से तंग आकर किया है। उनका मकसद संविधान नहीं, संसद भंग करना है।

गौरतलब है कि अंतरिम पीएम के नाम को लेकर बुधवार शाम तक पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनने की खबर आई थीं, लेकिन गुरुवार दोपहर तक ‘लाइट मैन’ कहे जाने वाले कुलमान घीसिंग का नाम सामने आ गया। कई दौर की बातचीत के बाद अंतरिम पीएम के लिए सुशीला कार्की, बालेन शाह, कुलमान घीसिंग और हरका सम्पांग के नाम आए हैं।

दूसरी ओर सेना ने एहतियातन राजधानी और उससे सटे इलाकों में तीसरे दिन कर्फ्यू जारी रखा है। सेना ने कहा है कि इस राजनीतिक संकट का समाधान और कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। नई कार्यकारी सरकार के पास तय समय में चुनाव कराने की जिम्मेदारी होगी। नेपाल हिंसा में अब तक 34 मौतें हुई है, जबकि 13 सौ से ज्यादा लोग घायल हैं।  इस बीच नेपाल में चल रही अशांति के कारण देश में फंसे विदेशी पर्यटकों को राहत देने के लिए नेपाल के आव्रजन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। उसने ऐलान का है कि आठ सितंबर के बाद जिन विदेशी पर्यटकों के वीजा की मियाद खत्म हो गई है, उनके वीजा को मुफ्त में रिन्यू किया जाएगा।


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