इम्पैक्ट एआई समिट का

Categorized as संपादकीय

बेशक, नई दिल्ली में इस इवेंट का आकार पिछले तीन शिखर सम्मेलनों से बड़ा है। कहा गया है कि इसके जरिए भारत संदेश देना चाहता है कि एआई के क्षेत्र में वह एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग को यथासंभव विनियमित करने के मकसद से ब्रिटेन में 2023 में शुरू हुए शिखर सम्मेलन का सिलसिला अब नई दिल्ली पहुंचा है। लेकिन जो सवाल लंदन समिट में था, वह अब भी मौजूद है कि इस आयोजन से हासिल क्या हो रहा है? लंदन और सियोल के बाद पिछले साल मेजबान बने पेरिस ने यह आयोजन एआई एक्शन समिट के नाम से किया। अब भारत ने इसे एआई इम्पैक्ट समिट नाम दिया है। बेशक, नई दिल्ली में इवेंट का आकार पिछले तीन शिखर सम्मेलनों से बड़ा है। कहा गया है कि इसके जरिए भारत संदेश देना चाहता है कि एआई के क्षेत्र में वह एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है।

मगर इस संदेश के अधिक ग्राहक भारत में ही होंगे, क्योंकि वैश्विक स्तर पर फिलहाल एआई में होड़ अमेरिका और चीन के बीच ही है। दोनों अलग मॉडल और अलग प्रतिमान के साथ इस तकनीक को आगे बढ़ा रहे हैं। अमेरिका ने निजी क्षेत्र के नेतृत्व में विकेंद्रित मॉडल अपनाया है। सरकार ने इस क्षेत्र को विनियमन से परे रखने की नीति अपनाई है। जबकि चीन ने 2023 में ग्लोबल एआई गवर्नेंस पहल शुरू की। पिछले साल उसने एआई संचालन की वैश्विक कार्ययोजना पेश की। एआई समिट की अच्छी बात यह है कि उससे उपरोक्त दो दृष्टियों को आपस में संवाद बनाने का मौका मिलता है।

नई दिल्ली में भी अमेरिकी और चीनी प्रतिनिधिमंडलों पर लोगों की निगाहें टिकी होंगी। जहां तक भारत की बात है, एआई सक्षम हार्डवेयर के लिए आयात पर निर्भरता और स्वदेशी मॉडल के अभाव की मूलभूत चुनौतियां बदस्तूर कायम हैं। भारत ने अपनी भूमिका अमेरिकी कंपनियों को डेटा सेंटर बनाने की सुविधा देने तथा अमेरिकी प्रतिमान के मुताबिक सेवा मुहैया कराने की बनाई है। उधर एक समय कहा जाता था कि अमेरिका तकनीक का आविष्कार करता है, चीन उसकी नकल करता है, और यूरोप उसे विनियमित करता है। लेकिन नए हालत में अमेरिका और चीन दोनों ने उसे इस भूमिका से वंचित कर दिया है। यही कारण है उसकी पहल पर शुरू हुए इस समिट का इम्पैक्ट सीमित ही है।


Previous News Next News

More News

कांग्रेस के अजब गजब उम्मीदवार

March 6, 2026

कांग्रेस पार्टी को इस बार राज्यसभा की एक सीट का फायदा हो रहा है। वह इसलिए हो रहा है क्योंकि एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से एक सीट देने का फैसला किया। कांग्रेस पार्टी के नेता दिखावा करने के लिए पवन खेड़ा का नाम ले रहे थे। सबको पता था कि अगर तमिलनाडु से कांग्रेस को…

कबूतरी संचार की पुरानी व्यवस्था

March 6, 2026

ओडिशा पुलिस की यह सेवा अनूठी है। 1946 में, द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद, ओडिशा पुलिस ने इसे शुरू किया। सबसे पहले नक्सल प्रभावित कोरापुट जिले में प्रयोग किया गया। धीरे-धीरे यह 38 स्थानों (जिलों, सब-डिवीजनों, सर्कलों और पुलिस स्टेशनों) तक फैल गई। इस सेवा के चरम पर 19 ‘पिजन लॉफ्ट’ सक्रिय थे, जहां…

कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

March 6, 2026

साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के नीचे खड़ी है। कोई भी समय कभी भी इस पूरी व्यवस्था को पटरी से नीचे उतार सकता है, जैसे इस समय भूमंडलाकरण के साथ वैश्विक…

बेहतर विदाई के हकदार थे नीतीश

March 6, 2026

बिहार में नीतीश कुमार युग का अंत हो गया है। इसमें कोई हैरानी या दुख की बात नहीं है। हर नेता का युग आता है और समाप्त होता है। बिहार में ही जैसे लालू प्रसाद का युग खत्म हुआ वैसे ही नीतीश का भी खत्म हुआ। फर्क इतना है कि लालू प्रसाद चुनाव हार कर…

नीतीश सीएम पद छोड़ेंगे

March 6, 2026

पटना। दो दशक के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके साथ मौजूद रहे। इससे पहले नीतीश कुमार ने एक लंबी पोस्ट लिख कर सोशल मीडिया में साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा…

logo