सच को स्वीकार कीजिए

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2026 में भारत वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी करने वाला है। भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भी दावेदार है। इस बीच विदेशी खिलाड़ियों की शिकायतों से भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्रबंधन क्षमता को लेकर खराब छवि बन सकती है।

भारत की मेजबानी व्यवस्था पर डेनमार्क के खिलाड़ियों के गंभीर सवाल उठाने से इंडिया ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट गैर-जरूरी विवाद से घिर गया है। भारतीय जनमत के एक हिस्से ने आलोचनाओं को सहज स्वीकार नहीं किया है। बल्कि किंडबी श्रीकांत जैसे बड़े खिलाड़ी जवाब देने के अंदाज मे यह बताने की हद तक चले गए हैं कि डेनमार्क में व्यवस्था भारत से कहीं खराब रहती है। बहरहाल, ऐसे जवाबों से मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होगा। नजरिया सुधार का नहीं रहा, तो उसका असर भविष्य में भारत की खेल मेजबानियों पर पड़ सकता है। विश्व के नंबर तीन खिलाड़ी और चार बार के वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक विजेता एंडर्स एंटोनसन नई दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण लगातार तीसरे साल टूर्नामेंट में भाग लेने नहीं आए।

विवाद हुआ, तो दिल्ली के एक्यूआई डेटा का स्क्रीन शॉट सोशल मीडिया पर डालते हुए कहा कि यह बैडमिंटन खेलने के लिए उपयुक्त नहीं है। टूर्नामेंट में ना आने के कारण बैंटमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन ने उन पर 5000 डॉलर का जुर्माना लगाया है। बहरहाल, टूर्नामेंट में आईं डेनमार्क की ही खिलाड़ी मिया ब्लिचफेल्ट ने प्रशिक्षण स्थल जाधव इंडोर स्टेडियम और प्रतियोगिता स्थल इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में गंदगी और धूल की शिकायत की। कहा कि यह खेल योग्य स्वस्थ माहौल नहीं है। इसी विवाद के बीच इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेल के दौरान बंदर के घुस आने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।

2026 में भारत वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी करने वाला है। उसके पहले अंतरराष्ट्रीय ख्याति के खिलाड़ियों की इस तरह की शिकायतें दुर्भाग्यपूर्ण हैं। भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी गंभीर दावेदार है। इस बीच विदेशी खिलाड़ियों की शिकायतें भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्रबंधन क्षमता को लेकर नकारात्मक छवि बना सकती हैं। उससे भारत के खुद को स्पोर्ट्स हब के रूप में पेश करने के प्रयासों पर खराब असर हो सकता है। इसलिए भारत को इन शिकायतों को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। स्टेडियम में स्वच्छता, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, वायु प्रदूषण पर नियंत्रण, और खिलाड़ियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने को मिशन की तरह लिया जाना चाहिए।


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