जो अंदर की बात

Categorized as संपादकीय

ताजा ट्रेंड में एक गंभीर चिंता का पहलू छिपा है। लगातार पांच महीने से खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति गिर रही है। इससे उद्योगिक उत्पादों की तुलना में खाद्य पदार्थ सस्ते हो रहे हैं। कृषि निर्भर आबादी के लिए यह चिंताजनक खबर है।

अक्टूबर में मुद्रास्फीति की दर महज 0।25 प्रतिशत रही। 2012 में- जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की मौजूदा शृंखला शुरू हुई- उसके बाद से कभी मुद्रास्फीति इतनी कम नहीं रही। चूंकि ऐसा अक्टूबर में हुआ, यह लाजिमी है कि इसे जीएसटी में 22 सितंबर से लागू हुई कटौती का सकारात्मक नतीजा बताया जाए। खुद केंद्र ने भी इसे इसी रूप में पेश किया है। मगर आंकड़ों के अंदर झांकें, तो कहानी वैसी नजर नहीं आती। मुद्रास्फीति की दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, और उसमें भी सब्जियों की कीमत में गिरावट के कारण इस हद तक गिरी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी के मुताबिक अगर खाद्य पदार्थों को अलग कर दें, तो जिसे कोर (औद्योगिक क्षेत्र के आठ प्रमुख सेक्टरों से संबंधित) इन्फ्लेशन कहते हैं, वह 4।3 प्रतिशत रहा।

गौरतलब है कि जीएसटी की दरों में बदलाव का सबसे ज्यादा संबंध औद्योगिक उत्पादन से ही है। इसके अलावा यह भी गौरतलब है कि फिलहाल मुद्रास्फीति दर जिस कम स्तर पर दिख रही है, उसका एक बड़ा कारण वो ऊंचा आधार है, जिसकी तुलना में इसे मापा गया है। मुद्रास्फीति पिछले साल के उसी महीने में रही दर की तुलना में देखी जाती है। अक्टूबर 2024 में महंगाई दर 9 फीसदी से भी ऊपर थी। उसकी तुलना में पिछले महीने की दर बहुत कम नजर आती है। मगर इसका यह मतलब नहीं है कि आम उपभोक्ता के लिए अब सचमुच ‘बचत उत्सव’ आ गया है।

बल्कि ताजा ट्रेंड में एक गंभीर चिंता का पहलू छिपा है। अक्टूबर लगातार पांचवां महीना रहा, जिसमें खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति गिरी। इससे उद्योगिक उत्पादों की तुलना में खाद्य पदार्थों की कीमत का फासला बढ़ता जा रहा है। साफ है, कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की अर्थव्यवस्था इससे बिगड़ेगी। आखिर उनके उत्पादों को बाजार में उससे काफी कम कीमत मिलेगी, जितना औद्योगिक उत्पादों को खरीदने के लिए उन्हें खर्च करना होगा। अतः देश की बहुसंख्यक आबादी के लिहाज से मुद्रास्फीति का यह ट्रेंड अच्छी खबर नहीं है। मगर, आपदा में अवसर ढूंढ लेने का नजरिया जब हावी हो, तो इतनी बारीकियों में जाने की फुर्सत आखिर किसे है?


Previous News Next News

More News

बिहार, यूपी का संगठन बनवा कर जाएंगे राहुल!

June 15, 2026

राहुल गांधी का बिहार और उत्तर प्रदेश जाने का कार्यक्रम बन गया है। वे 10 जुलाई को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और 11 जुलाई को बिहार के पटना जाएंगे। दोनों जगह उनको छात्र सम्मेलन करना है। उससे पहले पार्टी के नेताओं ने यह मांग उठाई है कि संगठन को ठीक कर दिया जाए। ध्यान रहे…

उद्धव ठाकरे की क्या शिव सेना टूटेगी?

June 15, 2026

दिल्ली में उद्धव ठाकरे की शिव सेना के संसदीय नेता अरविंद सावंत ने इस बात से इनकार किया है। लेकिन यह चर्चा तेज है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी टूट सकती है। उनके नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसदों की दिल्ली में एकनाथ शिंदे से मुलाकात की खबर है। बताया जा रहा है कि…

नाथवानी की जीत भी पक्की ही है!

June 15, 2026

रांची में इन दिनों यह सवाल मजाक के तौर पर पूछा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में भाजपा के महेश केवट जीत गए तो झारखंड में परिमल नाथवानी को कौन रोक लेगा? सवाल सही है। कोई नहीं रोक सकता है। कांग्रेस के लोग ही बता रहे हैं कि उनके 16 विधायकों में से आधा…

मध्य प्रदेश में क्या कांग्रेस की इज्जत बच गई?

June 15, 2026

ऐसा कांग्रेस पार्टी के ही नेता कह रहे हैं। उनका कहना है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नियुक्त चुनाव अधिकारी अरविंद शर्मा ने कांग्रेस की इज्जत बचा ली। क्योंकि अगर वे मीनाक्षी नटराजन का नामांकन नहीं खारिज करते तो मीनाक्षी चुनाव में हारतीं। वह कांग्रेस के लिए ज्यादा शर्मिंदा होने की बात होती कि उसके…

तमिलनाडु में विजय क्या सफल होंगे?

June 15, 2026

मुख्यमंत्री विजय ने अपने व्यवहार से एक शुभ संकेत दिया है। मुख्यमंत्री का पद संभालते ही वे विपक्षी दलों के सभी बड़े नेताओं के घर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने गए थे। इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक अनूठी पहल माना गया है। शपथ ग्रहण करते ही तीन अहम आदेशों पर हस्ताक्षर किए। जिनमें दो प्रमुख…

logo