भोपाल का शांत ओपेरा

भारत का साहित्यिक भविष्य केवल मेगा-उत्सवों पर नहीं टिक सकता। उसे जड़ों वाले, उच्च-सत्यनिष्ठ केंद्रों का नक्षत्र चाहिए, विशेषकर द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में, जहाँ जिज्ञासा प्रचुर है पर मंच दुर्लभ। बीएलएफ दिखाता है कि जब गंभीरता पर भरोसा किया जाए और ज्ञात श्रोताओं का सम्मान हो, तो क्या संभव है। इसका प्रभाव… Continue reading भोपाल का शांत ओपेरा

भारत को एक सूत्र में जोड़ता है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति पर्व भारतीय संस्कृति का महान लोकपर्व सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है जो देश के प्रत्येक कोने में अलग अलग स्वरूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में जाना जाता हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा… Continue reading भारत को एक सूत्र में जोड़ता है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति: देवताओं का काल उत्तरायण

मकर संक्रांति का महत्व सूर्य के उत्तरायण होने से जुड़ा है। शीतकाल के अंत में सूर्य मकर रेखा को पार करते हुए उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। वास्तव में मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने और मकर राशि में प्रवेश करने के शुभ अवसर का पर्व है। इसे देवताओं… Continue reading मकर संक्रांति: देवताओं का काल उत्तरायण

स्वामी विवेकानंद और युवा दिवस

एक बड़े स्वप्नदृष्टा के रूप में विवेकानंद ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जिसमें धर्म अथवा जाति के आधार पर मनुष्य-मनुष्य में कोई भेद न रहे। उनका आत्मा और परमात्मा में अनन्य विश्वास था। उनके अनुसार भिन्न-भिन्न स्रोतों से निकलकर सभी नदियों के समुद्र में मिल जाने की भांति ही भिन्न-भिन्न रुचि के… Continue reading स्वामी विवेकानंद और युवा दिवस

दूषित जल की समस्या का समाधान क्या?

दूषित जल की समस्या का समाधान संभव है, यदि बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया जाए। सबसे पहले, स्रोत पर प्रदूषण को रोकना जरूरी है। उद्योगों को अपशिष्ट उपचार संयंत्र स्थापित करने के लिए बाध्य किया जाए। कृषि में जैविक खेती को प्रोत्साहित करें ताकि रसायनों का अपवाह कम हो। सीवेज उपचार को 100% बनाना चाहिए, जो वर्तमान… Continue reading दूषित जल की समस्या का समाधान क्या?

क्या हारती हुई बाजी लड़ रही हैं ममता दीदी?

क्या 15 साल की एंटी इन्कम्बैंसी के कारण उनकी स्थिति कमजोर हुई है? ध्यान रहे ल़ड़ना, भिड़ना उनके स्वभाव का हिस्सा है और एक समय राज्य के लोगों ने इसे पसंद भी किया। लेकिन अब इसकी तीव्रता बढ़ती जा रही है। उनके स्वभाव की उग्रता का असर उनकी पूरी पार्टी के ऊपर दिख रहा है।…… Continue reading क्या हारती हुई बाजी लड़ रही हैं ममता दीदी?

‘वेनेजुएला’ से भारत का क्या सबक?

वेनेजुएला पर अमेरिका का औचक सैन्य हमला कोई अपवाद नहीं है। यह उसी शाश्वत सिद्धांत को पुनर्स्थापित करता है, जो सदियों से वैश्विक राजनीति को संचालित करता आया है— ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’। स्वयंभू ‘सभ्य समाज’ का हाल यह है कि वह केवल शांति, संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर उपदेश देता है, लेकिन शक्ति के… Continue reading ‘वेनेजुएला’ से भारत का क्या सबक?

वेनेजुएला में अमेरिका की ताकत दिखी या कमजोरी?

ट्रंप काल में अमेरिका को अपनी साम्राज्यवादी मंशाओं को पूरा करने के लिए नग्न होना पड़ रहा है। दुनिया फिलहाल हैरत के साथ यह नंगा नाच देख रही है, मगर वह इन नग्नता के पीछे की कमजोरी भी देख रही है। इसीलिए ये संभावना बनी हुई है कि वेनेजुएला में ट्रंप प्रशासन ने जो दुस्साहस… Continue reading वेनेजुएला में अमेरिका की ताकत दिखी या कमजोरी?

न सफेद झक्क, न काली कट्ट

एक प्रधानमंत्री जी मानते हैं कि उन की निर्णयात्मक क्षमता अभूतपूर्व है, अद्भुत है और सटीक है। सो, वे बिना किसी से सालह-मशवरा करे निर्णय लेते हैं और सब पर थोप देते हैं। उन्हें इस से कोई लेनादेना ही नहीं है कि उन का फ़ैसला कितना अर्थवान है और कौन क्या सोचेगा?… इसलिए इसी में… Continue reading न सफेद झक्क, न काली कट्ट

इंडिगो प्रकरणः नियामक की सुस्ती घातक

नागर विमानन मंत्रालय और डीजीसीए दोनों अक्सर डेटा दिखाते हैं कि हर साल सैकड़ों इनफोर्समेंट एक्शन लिए जाते हैं, जिसमें चेतावनी, सस्पेंशन, कैंसिलेशन और आर्थिक दंड शामिल हैं। लेकिन कागज़ी कार्रवाई और वास्तविक नज़ीर के बीच एक बड़ा एग्ज़िक्यूशन गैप है। हाल के वर्षों में 500–600 से अधिक एन्फ़ोर्समेंट एक्शन हर साल दर्ज हुए, पर… Continue reading इंडिगो प्रकरणः नियामक की सुस्ती घातक

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