आयोजन की अव्यवस्था एक रूपक बन गई। भीड़ से भरे हॉल, कमजोर कनेक्टिविटी और कड़ी सुरक्षा ने उन सहज संवादों को बाधित किया, जहां से नए विचार जन्म लेते हैं। यदि भारत नेतृत्व चाहता है तो उसे पैमाने के साथ-साथ सटीकता भी साधनी होगी—वह शांत दक्षता जो घोषणाओं को टिकाऊ संस्थाओं में बदलती है।….उत्सवी मॉडल… Continue reading यह न केवल चेतावनी बल्कि दावं पर भविष्य
