‘चांद मेरा दिल’ कोई कालजयी प्रेमकथा नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह खोखली भी नहीं है। यह सुंदर है, ईमानदार है, संवेदनशील है, और कई क्षणों में प्रभावशाली भी। यह चांद तक पहुंचने वाली फ़िल्म नहीं, लेकिन उसकी रोशनी में बैठकर कुछ देर अपने पुराने प्रेम, अपनी असुरक्षाओं और अपने अधूरे संवादों को याद करने… Continue reading ‘चांद मेरा दिल’: प्रेम की बदलती भाषा
