याद करें 14 मई 2014 से पहले के समय को! तब हवा में, लोगों की सांसों में, उम्मीदों में क्या कुछ था? उमंग थी, उम्मीदें थीं, ‘अच्छे दिनों’ की आहट थी। हिंदू कोई हो, वह भारत का अवसर आया बूझ रहा था। मानों हिंदुओं का कलियुग खत्म होने वाला है, सतयुग आ रहा है। काला… Continue reading भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!
