साइबर अपराध की ठगी में लुटते भारतीय!

Categorized as लेख

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले बुजुर्ग एनआरआई दंपत्ति, ओम तनेजा और डॉ. इंदिरा तनेजा, के साथ हुई घटना इसकी एक दर्दनाक मिसाल है। यह दंपत्ति अमेरिका से 2014 में अपनी मातृभूमि की सेवा करने के इरादे से भारत लौटे थे, लेकिन साइबर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दो सप्ताह से अधिक समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित कर 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए।

साइबर अपराध अब डिजिटल दुनिया में का वह एक विषाणु है जो न केवल आम आदमी की मेहनत की कमाई को चंद मिनटों में उड़ा देता है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों: बुजुर्गों और अशिक्षितों को भी अपना शिकार बना लेता है। हाल ही में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग एनआरआई दंपत्ति, ओम तनेजा और डॉ. इंदिरा तनेजा, के साथ हुई घटना इसकी एक दर्दनाक मिसाल है। यह दंपत्ति अमेरिका से 2014 में अपनी मातृभूमि की सेवा करने के इरादे से भारत लौटे थे, लेकिन साइबर ठगों ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर दो सप्ताह से अधिक समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित कर 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए।

यह दिल्ली में हुई अब तक के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में से एक है, जहां ठगों ने खुद को दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई), मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर दंपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स से जुड़े झूठे आरोपों में फंसाया। इस घटना ने न केवल इस दंपत्ति की जीवनभर की बचत छीन ली, बल्कि पूरे देश में साइबर सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

इस मामले में मुंबई पुलिस और सीबीआई के फर्जी अधिकारियों ने उन्हें डर धमका कर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा, जहां वे घर से बाहर नहीं निकल सकते थे और लगातार निगरानी में रहने को मजबूर थे। ठगों ने धमकी दी कि अगर वे सहयोग नहीं करेंगे, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके बच्चे भी फंस जाएंगे। दंपत्ति, जो शिक्षित और अमेरिका में दशकों तक काम कर चुके थे, डर के मारे इनकी हर गैरकानूनी शर्तों पर सहमत हो गए।

उन्होंने अपनी म्यूचुअल फंड और बचत खातों से 8 अलग-अलग ट्रांसफर में 14.85 करोड़ रुपये ‘वेरिफिकेश’ के नाम पर ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए, जिसमें हर ट्रांसफर लगभग 2 करोड़ का हुआ।

गौरतलब है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है, भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच ऐसे मामले तीन गुना बढ़कर 1,23,000 हो गए और पीड़ितों से करोड़ों रुपये ठगे गए। उदाहरण के तौर पर, मुंबई में एक 86 वर्षीय महिला से 20 करोड़ रुपये ठगे गए, जहां ठगों ने खुद को अधिकारियों के रूप में पेश किया।

बेंगलुरु में एक महिला टेकी से 32 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जो इनसाइडर ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कैम से जुड़ी थी। मुंबई में एक 72 वर्षीय व्यवसायी और उनकी पत्नी से 58 करोड़ रुपये उड़ाए गए, जहां ठगों ने उन्हें दो महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। दिल्ली में ही एक और बुजुर्ग व्यवसायी महिला से 6.9 करोड़ रुपये ठगे गए। ये मामले दिखाते हैं कि ठग बुजुर्गों और शिक्षितों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वे डर और अकेलेपन का फायदा उठाते हैं। कुल मिलाकर, 2025 में केवल दिल्ली में ही 1,250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई और पूरे भारत में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

सवाल उठता है कि आज के टेक्निकल युग में देश का सिस्टम क्यों फेल हो रहा है? अपराधी मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया कंबोडिया, म्यांमार, लाओस और चीन से ऑपरेट करते हैं, जहां वे भारतीयों को ट्रैफिक कर ‘स्लेव कंपाउंड्स’ में साइबर अपराध करवाते हैं। फ़र्ज़ी कॉल्स, फेक आईडी और एआई का इस्तेमाल कर वे भारतीय सिस्टम को चकमा देते हैं।

जानकारों के अनुसार, भारतीय पुलिस में कुशल कर्मचारियों की कमी, पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी खामियां इसका एक बड़ा कारण हैं। जांच धीमी है, क्योंकि अपराध सीमा पार से हो रहे हैं और पैसा विदेशी खातों में जाता है। बैंक राष्ट्रीय सहयोग के अपराधियों को पकड़ना मुश्किल है। अपराधी कम जोखिम में ज्यादा कमाई करते हैं और पकड़े जाने की दर काफ़ी कम है।

सोचने वाली बात है कि क्या सरकार केवल जागरूकता फैलाने तक ही सीमित है? नहीं, लेकिन सरकार द्वारा किए जाने वाले प्रयास अपर्याप्त हैं। गृह मंत्रालय ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) स्थापित किया है, जहां नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और हेल्पलाइन 1930 काम करते हैं। अब तक 9.42 लाख सिम ्लॉक किए गए। सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम ने 5,489 करोड़ रुपये बचाए। प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में जागरूकता फैलाई और विज्ञापन, रेडियो, मेट्रो में अभियान चलाए। 26 दिसंबर 2025 को इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी बनी, जो गूगल, व्हाट्सऐप जैसी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए नई एसओपी बनी और एआई-बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन पर जोर दिया जाने लगा। लेकिन शायद इतना सब भी काफी नहीं। इसके ्ट्रीय समझौतों जैसे यूएन साइबरक्राइम ट्रीटी को दृढ़ करना भी ज़रूरी है।

गौरतलब है कि ऐसे में आम आदमी क्या करे? सबसे पहले, याद रखें कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानून नहीं है। कोई कॉल आए तो उसकी जाँच करें, पुलिस स्टेशन जाकर सूचना दें और इसे चेक करें। किसी भी स्थिति में पैसे ट्रांसफर न करें, ओटीपी शेयर न करें। अपने घर परिवार में बुजुर्गों को शिक्षित करें, अकेले न छोड़ें। सरकारी जागरूकता अभियान के अनुसार यदि आप भी साइबर फ्रॉड के शिकार होते हैं तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

बैंक को सूचित कर ट्रांसफर फ्रीज करवाएं। एफआईआर दर्ज कराएं और कोर्ट ऑर्डर से पैसा वापस पा सकते हैं। जैसे कि बेंगलुरु में एक दंपत्ति ने अपने 1.4 करोड़ रिकवर किए। जागरूकता फैलाएं, क्योंकि परहेज इलाज से बेहतर होता है। ऐसी घटनाएँ साइबर अपराध की गंभीरता दर्शाती है। सरकार को राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी अपग्रेडेशन पर फोकस करना चाहिए। अन्यथा, ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना एक डरावना सपना बन जाएगा। आम आदमी की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है, समय है कड़े कदम उठाने का।


Previous News Next News

More News

प्रहलाद जोशी के जरिए बड़ा संदेश

July 29, 2026

ऐसी चर्चा थी कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देंगे तो डॉक्टर जितेंद्र सिंह को उनकी जगह शिक्षा का प्रभार दिया जाएगा। यह अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान वे सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। प्रधानमंत्री आवास के सामने राहुल गांधी के…

अब ई-20 पार्टी बन कर तैयार है

July 29, 2026

सरकार अभी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से मिले जख्मों को सहला ही रही है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 पेट्रोल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए ई-20 पार्टी का गठन हो गया है। इस पार्टी को सोशल मीडिया में पर्याप्त समर्थन भी मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी…

क्या दिपके राजनीतिक पार्टी बनाएंगे?

July 29, 2026

अभिजीत दिपके और उनके नजदीकी लोग जैसे आशुतोष रांका और सौरव दास दावा कर रहे हैं कि अभी राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है और न चुनाव लड़ना है। लेकिन असल में दिपके और उनकी टीम राजनीतिक दल बनाएंगे। ध्यान रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग खास कर…

पीके से पूरा एनडीए लड़ रहा है

July 29, 2026

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए दुःस्वप्न साबित हो रहा है। भाजपा के कई नेता कह रहे हैं कि नितिन नबीन को सीट से इस्तीफा नहीं देना चाहिए थे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बाद वे राज्यसभा चले गए और उन्होंने बांकीपुर सीट से इस्तीफा दे दिया। इसकी वजह…

कॉकरोच: एक शब्द का बल

July 29, 2026

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने दिया था। उन के शब्दों ने हिटलर के सामने पस्त हो रहे इंग्लैंड को बल दिया। इस हद तक कि कई यूरोपीय देशों को टिके रह कर लड़ने का हौसला मिला।…. चर्चिल ने अंग्रेजी भाषा को बुलाया और उसे युद्धभूमि में उतार दिया।” आज कम…

logo